आवास, पेंशन और खाद संकट से आम जन परेशान, कलेक्टर से समस्या के निराकरण की मांग

 


-कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से पूर्व विधायक लेखराम साहू ने की चर्चा

धमतरी, 02 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री आवास योजना की लंबित राशि, वृद्धा एवं अन्य सामाजिक पेंशन के भुगतान में हो रही देरी तथा किसानों को खाद-बीज उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक लेखराम साहू ने मंगलवार को कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से मुलाकात की। उन्होंने जल्द से जल्द समस्याओं के निराकरण की मांग की।

उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने से गरीब, बुजुर्ग, दिव्यांग और किसान वर्ग गंभीर परेशानियों का सामना कर रहा है। धमतरी नगर निगम क्षेत्र के अनेक हितग्राहियों के प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान निर्माण कार्य छत ढलाई तक पहुंच चुके हैं, लेकिन अब तक स्वीकृत राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है और हितग्राही आर्थिक संकट में फंस गए हैं। महिमासागर वार्ड सहित विभिन्न क्षेत्रों के लाभार्थियों ने भी भुगतान में देरी को लेकर चिंता जताई है। लेखराम साहू ने आरोप लगाया कि वृद्धा, विधवा और दिव्यांग पेंशन की राशि भी पिछले छह माह से लंबित है। नियमित आय का कोई अन्य साधन नहीं होने के कारण पेंशनधारियों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या का तत्काल निराकरण करने की मांग की है।

ज्ञापन में ट्रेड लाइसेंस को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई गई है। उनका कहना है कि पहले से जीएसटी, ऑनलाइन कारोबार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि यदि किसी विभागीय मद से राशि उपलब्ध नहीं हो रही है तो अन्य वैकल्पिक मदों से धनराशि जारी कर प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर राहत मिल सके और उनका जीवन-यापन सुचारु रूप से चल सके। इस अवसर पर अन्य लोग मौजूद थे। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने पूर्व विधायक लेखराम साहू की बातें सुनने के बाद हरसंभव समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया।

लेखराम साहू ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि खरीफ सीजन से पहले खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। प्रशासन भले ही पर्याप्त खाद भंडारण की बात कह रहा है लेकिन वास्तविकता अलग है। वर्तमान में किसानों को आवश्यक मात्रा में उर्वरक नहीं मिलने से वे खुले बाजार और बिचौलियों से अधिक कीमत पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा