सक्ती : सड़क नहीं होने से कीचड़ और नदी पार कर निकली अंतिम यात्रा
सक्ती, 04 जुलाई (हि. स.)। विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का बड़ा अंतर शनिवार को सक्ती जिले से लगे ग्राम पंचायत सोंठी में उस समय सामने आ गया, जब एक बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को शव लगभग एक किलोमीटर तक अपने कंधों पर उठाकर कीचड़ भरे रास्ते से ले जाना पड़ा।
रास्ते में घुटनों तक कीचड़ और पानी से जूझते हुए ग्रामीणों ने बोराई नदी भी पार की, तब कहीं जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सोंठी निवासी कमलाबाई महंत (60 वर्ष) का शुक्रवार रात बीमारी के चलते निधन हो गया। शनिवार सुबह परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर घर से निकले। लेकिन गांव से श्मशान तक जाने वाला मुख्य मार्ग हाल ही में हुई बारिश के कारण पूरी तरह दलदल में बदल चुका था। सड़क पर जगह-जगह गहरा कीचड़ और पानी जमा होने से किसी भी प्रकार के वाहन का वहां तक पहुंचना संभव नहीं था। यहां तक कि पैदल चलना भी बेहद कठिन हो गया था।
परिजनों के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से शव को कंधों पर उठाया और सावधानीपूर्वक कीचड़ से भरे रास्ते पर आगे बढ़ते रहे। कई जगह फिसलन होने के कारण लोगों को संभल-संभलकर चलना पड़ा। करीब एक किलोमीटर का यह कठिन सफर तय करने के बाद भी परेशानी खत्म नहीं हुई। श्मशान पहुंचने से पहले उन्हें पानी से लबालब भरी बोराई नदी को पार करना पड़ा।
नदी पार करने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। हर वर्ष बरसात के मौसम में गांव का यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और किसानों को भी इसी समस्या से जूझना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब किसी का निधन हो जाता है और शव को इसी रास्ते से श्मशान तक ले जाना पड़ता है। कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
ग्रामीणों ने बताया कि रेलवे फाटक से बोराई नदी तक लगभग एक किलोमीटर सड़क निर्माण की मांग कई वर्षों से की जा रही है। ग्राम पंचायत ने मनरेगा के तहत पहले चरण में मिट्टी-मुरुम सड़क निर्माण का प्रस्ताव भी पारित कर जनपद पंचायत को भेजा है, लेकिन अब तक न तो प्रस्ताव को स्वीकृति मिली और न ही किसी अन्य योजना से सड़क निर्माण का कार्य शुरू हो सका। परिणामस्वरूप हर बारिश में गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है।
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार गांवों को सड़क, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर बसे गांव की यह स्थिति उन दावों की वास्तविकता को सामने ला रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस सड़क का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा इस तरह की कठिन परिस्थितियों में पूरी न करनी पड़े।
इस संबंध में ग्राम पंचायत सोंठी के सचिव रामनारायण सिदार ने बताया कि रेलवे फाटक से बोराई नदी तक मिट्टी-मुरुम सड़क निर्माण के लिए मनरेगा के तहत प्रस्ताव जनपद पंचायत को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य कराया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार/लालिमा शुक्ला पुरोहित
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हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT