खेत से जापान तक पहुंची नगरी दुबराज की सुगंध
महिला किसानों ने लिखी सफलता की नई कहानी
धमतरी, 28 सितंबर (हि.स.)। कभी नगरी अंचल के खेतों और घरों तक सीमित रहने वाली सुगंधित धान की पारंपरिक पहचान ‘नगरी दुबराज’ अब खेतों की मेड़ से निकलकर देश के विभिन्न शहरों और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी खुशबू पहुंचा रही है।
जीआई टैग प्राप्त इस विशिष्ट सुगंधित धान को गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) ने जैविक उत्पादन, सामूहिक प्रयास, मूल्य संवर्धन, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और आधुनिक विपणन से नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ जिला का नगरी दुबराज जापान तक पहुंच गया है। नगरी दुबराज आज नगरी की पहचान, किसानों की विरासत और छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पाद को आगे बढ़ रहा है।
नगरी दुबराज को केवल कृषि उपज के रूप में नहीं, बल्कि नगरी क्षेत्र की पीढ़ियों पुरानी कृषि विरासत और स्थानीय पहचान के प्रतीक के रूप में बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और पारंपरिक महत्व इसे अन्य धान किस्मों से अलग पहचान देते हैं। गट्टासिल्ली एफपीओ ने इसी विशेषता को अवसर में बदलते हुए किसानों को संगठित किया और नगरी दुबराज को कच्चे कृषि उत्पाद के बजाय एक विशिष्ट ब्रांडेड उत्पाद के रूप में बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम शुरू किया। एफपीओ के माध्यम से किसानों को उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, लेबलिंग और विपणन तक व्यवस्थित व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ने की पहल
बदलते बाजार और डिजिटल व्यापार की संभावनाओं को देखते हुए गट्टासिल्ली एफपीओ ने नगरी दुबराज को अमेजन, ओएनडीसी और ट्राइब्स इंडिया जैसे डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ने की पहल की है। इससे उपभोक्ताओं को घर बैठे नगरी दुबराज खरीदने की सुविधा मिल रही है और उत्पाद की पहुंच स्थानीय बाजार से आगे देश के अलग-अलग हिस्सों तक बढ़ रही है। प्रशासन द्वारा किसानों और एफपीओ को क्षमता निर्माण, जैविक उत्पादन, संस्थागत विकास तथा बाजार से जोड़ने के लिए किए जा रहे सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तकनीकी मार्गदर्शन और संस्थागत क्षमता विकास ने एफपीओ को किसानों के सामूहिक उद्यम तथा बाजार संपर्क के माध्यम के रूप में विकसित करने में मदद की है।
गट्टासिल्ली एफपीओ का लक्ष्य केवल नगरी दुबराज की बिक्री बढ़ाना नहीं, बल्कि इसे नगरी की मजबूत स्थानीय पहचान और ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। इसके माध्यम से नगरी क्षेत्र की पारंपरिक कृषि विरासत को नई पीढ़ी और आधुनिक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। एफपीओ की मंशा है कि ‘नगरी की पहचान—नगरी दुबराज’ की पहुंच छत्तीसगढ़ से आगे देश के हर हिस्से तक हो और नगरी के किसानों की पारंपरिक कृषि विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थायी पहचान मिले।
चार माह पहले ह़ुआ था जापान में चावल निर्यात
नगरी दुबराज के विक्रय पैकेजिंग में शामिल ओम प्रकाश साहू, आरती कश्यप, प्रतिमा यादव ने बताया कि देश के पूरे राज्य में चावल का निर्यात किया जा रहा है। चार माह पहले जिला प्रशासन के सहयोग से जापान में 10 किलो चावल को सैंपल के लिए निर्यात किया गया था। हमारी समिति में 1005 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। गट्टासिल्ली फार्मिंग प्रोडक्शन कंपनी लिमिटेड द्वारा अमेजान व अन्य डिजिटल आनलाईन माध्यम से चावल का निर्यात हो रहा है। नई पैकेजिंग प्रति किलो 140 रुपये किलो से विक्रय किया जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा