रायगढ़ के एकमात्र सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में कर्मचारियों और प्राध्यापकों को 48 महीनों से वेतन नहीं
रायगढ़ , 12 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का एकमात्र सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केआईटी) आज गंभीर संकट से गुजर रहा है। कभी इंजीनियर तैयार करने वाला यह प्रतिष्ठित कॉलेज अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। कॉलेज के लगभग 60 कर्मचारी और प्रोफेसर पिछले 48 महीनों से वेतन के इंतजार में हैं। शासन पर उनका करीब 13 करोड़ रुपये वेतन बकाया बताया जा रहा है।
हालात ऐसे हैं कि 120 कमरों की विशाल इमारत में कॉलेज का संचालन अब महज 12 कमरों तक सीमित होकर रह गया है, जबकि शेष कमरों में अन्य संस्थानों ने कब्जा जमा लिया है। आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि कई कर्मचारियों ने घर खर्च चलाने के लिए अपनी पीएफ राशि निकाल ली, जबकि कुछ ने सोना-चांदी और जमा पूंजी तक बेच दी। लंबे समय से समाधान नहीं मिलने पर अब कर्मचारी न्यायालय की शरण लेने की तैयारी में हैं।
केआईटी की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन वर्षों से नए प्रवेश बंद हैं। बिना किसी स्पष्ट आधिकारिक आदेश के संस्थान को लगभग “जीरो ईयर” की स्थिति में पहुंचा दिया गया है।फिलहाल कॉलेज में केवल फाइनल ईयर के 25 छात्र ही अध्ययनरत हैं। आने वाले कुछ महीनों में इनके कोर्स पूर्ण होते ही संस्थान में छात्रों की संख्या शून्य हो सकती है।
केआईटी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और प्रोफेसरों ने अपने बयानों में स्पष्ट कहा कि 16 से 48 महीनों तक का वेतन न मिलने से उनकी स्थिति बदतर हो गई है। वे अपने घरों का खर्च चलाने और बीमार परिजनों का इलाज कराने तक में असमर्थ हो चुके हैं।अधिकारों की मांग: आंदोलन के दौरान जब कर्मचारियों से बात की गई, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, वेतन दिलवाना या पाना कोई एहसान नहीं होता है, यह हमारा हक है। कर्मचारियों का कहना था कि देश को हजारों इंजीनियर देने वाले शिक्षक आज खुद दाने-दाने को मोहताज होकर क्रमिक आमरण अनशन करने पर मजबूर हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान