पानी है तो पेड़ हैं और पेड़ हैं तो पानी है : राज्यपाल डेका
-विश्व पर्यावरण पर राज्यपाल ने दिया जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
रायपुर, 04 जून (हि.स.)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बढ़ते पर्यावरणीय संकट और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए प्रत्येक नागरिक को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। राज्यपाल ने कहा कि जल और जंगल एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि पानी रहेगा तो पेड़-पौधे सुरक्षित रहेंगे और यदि पेड़ रहेंगे तो जल स्रोतों का संरक्षण संभव होगा।
राज्यपाल ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य में योगदान है। वृक्ष पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने, वर्षा चक्र को मजबूत करने और भूजल स्तर को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि देश और दुनिया के अनेक क्षेत्रों में जल स्रोत लगातार घट रहे हैं। भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है। वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग, तालाबों और जल स्रोतों का संरक्षण तथा वृक्षारोपण जैसे प्रयास सामूहिक रूप से किए जाएं तो आने वाले वर्षों में जल संकट की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका लोक भवन तथा नया रायपुर स्थित निर्माणाधीन लोक भवन परिसर में वृक्षारोपण करेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी के माध्यम से एक व्यापक सामाजिक अभियान का स्वरूप दिया जाना चाहिए। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पेड़ लगाएं, जल बचाएं और प्रकृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर राज्यपाल डेका ने लोक भवन के कर्मचारियों को पौधे भेंट किए तथा उन्हें अपने घरों एवं आसपास पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर लोक भवन के सभी कर्मचारियों के लिए निशुल्क पौधों के वितरण की व्यवस्था की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / चन्द्र नारायण शुक्ल