विधानसभा में सरकार ने स्वयं जल जीवन मिशन की विफलता को स्वीकारा : लखेश्वर बघेल

 


जगदलपुर, 22 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने जल जीवन मिशन की बदहाल स्थिति को लेकर कहा कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार बस्तर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 135 ग्राम पंचायतों के 173 गांवों में जल जीवन मिशन के तहत 177 योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इनमें से आज तक केवल 53 योजनाएं पूर्ण हो सकी हैं, जबकि 124 योजनाएं अभी भी अधूरी हैं। सबसे गंभीर तथ्य यह है कि 173 गांवों में से केवल 51 गांवों में ही नल के माध्यम से जल प्रदाय प्रारंभ हो सका है, अर्थात 122 गांव आज भी इस सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा में दिए गए स्वयं सरकार के जवाब ने भाजपा सरकार के दावों की पोल खोल दी है। विधानसभा में सरकार स्वयं जल जीवन मिशन की विफलता को स्वीकार कर रही है।

विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि अपने विधान सभा क्षेत्र के बस्तर एवं बकावंड विकासखंड के लिए लगभग 306 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत हुईं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि 183 आरसीसी टंकियों में से केवल 111 टंकियां पूर्ण हुई हैं और मात्र 51 टंकियों से ही जल आपूर्ति शुरू हो पाई है। सरकार के जवाब में यह भी स्वीकार किया गया है कि 103 गांवों में पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बावजूद पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है इसका अर्थ है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि 17 नलकूप असफल रहे तथा कई गांवों में भू-जल की समस्या के कारण कार्य प्रभावित हुआ ऐसी परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी थी, लेकिन सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में असफल रही।

उप प्रतिपक्ष नेता लखेश्वर बघेल ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकार एक और दावा कर रही है कि ठेकेदारों को करीब 98.96 करोड़ रुपये (9896.81 लाख) का भुगतान किया जा चुका है, वहीं दूसरी ओर अधिकांश गांव आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। यह स्पष्ट करता है कि सरकार की प्राथमिकता जनता नहीं बल्कि केवल कागजी उपलब्धियां गिनाना है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार अब जल जीवन मिशन की समय-सीमा दिसंबर 2028 तक बता रही है। इसका अर्थ है कि जिन ग्रामीणों को हर घर नल से जल उपलब्ध कराने का वादा किया गया था, उन्हें अब भी वर्षों तक इंतजार करना पड़ सकता है।

उप नेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने कहा कि बस्तर के ग्रामीणों को घोषणाएं नहीं, घर-घर स्वच्छ पेयजल चाहिए। कांग्रेस पार्टी जनता के इस मूलभूत अधिकार की लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा तक लगातार उठाती रहेगी। राज्य सरकार से मांग है कि जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए, दोषी अधिकारियों एवं एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए तथा प्रत्येक गांव में समयबद्ध रूप से पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे