नक्सलवाद के खात्मे के बाद अबूझमाड़ के रामकृष्ण आश्रम कुतुल में गणपति उत्सव का आयाेजन
नारायणपुर, 15 सितंबर (हि.स.)। जिले के अबूझमाड़ के रामकृष्ण मिशन आश्रम में रहने वाले बच्चों ने इस बार गणपति उत्सव पर खास आयोजन किया है। रामकृष्ण मिशन आश्रम से जुड़े लोगों ने बताया कि वे इस साल का श्रीगणेश उत्सव खास है, क्योंकि नक्सलवाद के खात्मे के बाद बच्चों में त्योहार का लेकर इस बार खास उत्साह है।
स्थानीय ग्रामीण भी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं। आश्रम को लाइटों और झालरों से सजाया जा रहा है। अबूझमाड़ का कुतुल जिसे कभी नक्सलियों की राजधानी कहा जाता था, यहां पर अब सार्वजनिक पूजा पाठ और बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कभी इस इलाके में बिना नक्सिलयों की इजाजत के लोग बैठक करना तो दूर गांव से बाहर तक नहीं निकलते थे, लेकिन नक्सलवाद के खत्मे के बाद अब लोग खुली हवा में आजादी की सांस लेने लगे हैं, स्कूलों में पर्व त्योहार पर खुशियां मनाई जाने लगी है।
15 अगस्त के दिन भी यहां पर बच्चों ने तिंरगा यात्रा और प्रभात फेरी निकालकर नक्सलवाद रूपी अंधकार को काफी पीछे छोड़ चुके हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो पहले कोई भी पर्व त्योहार खुशी के साथ नहीं मना पाते थे। नक्सलियों का खौफ इतना ज्यादा हुआ करता था कि लोग अपने घरों में सिमटे रहते थे। तिरंगा झंडा लगाने की हिम्मत तक नहीं करते थे। लेकिन आज वक्त बदल चुका है, बच्चे शान से तिरंगा भी लहरा रहे हैं और पर्व त्योहार पर खुशियां भी मना रहे हैं। बच्चों की इन खुशियों में उनके माता-पिता भी शामिल हो रहे हैं।
रामकृष्ण मिशन आश्रम के शिक्षक कमलेश साहू का कहना है कि पहले नक्सली प्रभाव के कारण बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होती थी। कई बार आठवीं कक्षा के आस-पास पहुंचने के बाद बच्चों को नक्सली संगठन अपने साथ जोड़ने का प्रयास करते थे। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ता था। आज परिस्थितियां अलग हैं, बच्चे स्कूल जा रहे हैं, पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चे अपने भविष्य के लिए सुनहरे सपने देख रहे हैं और उन्हें पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे