सोलर दीदी’ से लायब्रेरी तक, ग्रामीण विकास की नई संभावनाओं को कलेक्टर ने दी गति

 


धमतरी, 27 अगस्त (हि.स.)। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने गुरुवार काे कुरूद विकासखंड के विभिन्न ग्रामीण एवं दूरस्थ

क्षेत्रों का भ्रमण कर राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं के जमीनी

क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया।

उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर

योजनाओं से मिल रहे लाभ, स्थानीय आवश्यकताओं और विकास की संभावनाओं की

जानकारी ली तथा अधिकारियों को योजनाओं के अभिसरण से क्षेत्र की जरूरतों के

अनुरूप ठोस एवं परिणाममूलक कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध क्रियान्वयन के

निर्देश दिए। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा,

वनमंडलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए स्थानीय

संसाधनों, मानव संसाधन और उपलब्ध अधोसंरचना को आपस में जोड़ते हुए रोजगार

एवं आजीविका के स्थायी अवसर विकसित करना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, सौर

ऊर्जा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वानिकी, पर्यटन, महिला स्व-सहायता समूहों,

कौशल विकास, रोजगार और अधोसंरचना से जुड़ी गतिविधियों को स्थानीय

आवश्यकताओं से जोड़कर आगे बढ़ाने पर जोर दिया। कुरूद स्थित प्रथम अरोरा

शिक्षण केंद्र में उन्होंने ‘सोलर दीदी’ पहल के माध्यम से स्थानीय महिलाओं

एवं युवाओं को सोलर पैनल के बेसिक प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन से जोड़ने पर

विशेष जोर दिया।

उन्होंने प्रशिक्षण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के

निर्देश देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा से जुड़े प्रशिक्षित युवा एवं महिलाएं

सोलर पैनल की स्थापना, रखरखाव एवं अन्य सेवाओं के माध्यम से गांव स्तर पर

रोजगार और स्वरोजगार प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षण के साथ प्रतिभागियों

को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की ठोस व्यवस्था विकसित करने

के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा और

पुस्तकालय सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि

विद्यार्थियों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, प्रतियोगी

परीक्षाओं की तैयारी तथा शांत एवं सुविधाजनक अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराना

आवश्यक है। अधिकारियों को क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप लायब्रेरी विकसित

करने, आवश्यक पुस्तकें एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने तथा युवाओं की

अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भ्रमण के दौरान एग्री

पायलट के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं आधुनिक तकनीकों के उपयोग

की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

कलेक्टर ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप

तकनीक एवं नवाचार को बढ़ावा देने, किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने

तथा कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और आय आधारित बनाने के लिए प्रभावी पहल

करने कहा। उन्होंने उत्पादन के साथ संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन

को जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के

साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। ग्राम पंचायत बगौद

में मेगा फूड पार्क की संभावनाओं का अवलोकन करते हुए उन्होंने कृषि एवं

स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

जीजामगांव स्थित मातंगी फॉरेस्ट गार्डन में

पौधरोपण एवं विकासात्मक गतिविधियों की संभावनाओं का जायजा लेते हुए

कलेक्टर ने हरित क्षेत्र के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण, सौंदर्यीकरण,

स्थानीय पर्यटन और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को विकसित करने पर जोर

दिया। उन्होंने क्षेत्र की क्षमता एवं आवश्यकताओं का आकलन कर मोंहरेंगा

प्रोजेक्ट के आधार पर प्राक्कलन तैयार करने तथा चरणबद्ध तरीके से कार्य आगे

बढ़ाने के निर्देश दिए। चटौद स्थित बिहान मार्ट के निरीक्षण के दौरान

उन्होंने स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की गुणवत्ता,

विविधता, पैकेजिंग और बाजार की संभावनाओं की जानकारी ली।

महिलाओं से संवाद

कर उनकी चुनौतियों और बिक्री संबंधी समस्याओं को समझा तथा गुणवत्ता सुधार,

आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और व्यापक बाजार से जोड़ने की दिशा में कार्य

करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि बिहान मार्ट जैसे स्थानीय बाजार

केंद्र महिला समूहों के उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रभावी

माध्यम बन सकते हैं और इससे महिलाओं की आय एवं आर्थिक स्वावलंबन को मजबूती

मिलेगी। उन्होंने ग्रीन पटाखे बनाने में जुटी महिलाओं से बातचीत कर उनकी

गतिविधियों की जानकारी ली और ग्रीन पटाखा फोड़कर उसका अवलोकन भी किया।

उन्होंने ग्रामीण युवाओं एवं स्थानीय लोगों की

क्षमता का आकलन कर उन्हें प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से

जोड़ने के लिए ठोस पहल करने कहा। बंधवा तालाब के सौंदर्यीकरण को भी विकास

गतिविधि के रूप में शामिल करने के निर्देश देते हुए उन्होंने तालाब एवं

आसपास के क्षेत्र के पर्यावरणीय, सामाजिक और पर्यटन महत्व को ध्यान में

रखते हुए सौंदर्यीकरण, स्वच्छता, हरित क्षेत्र विकास तथा जनोपयोगी सुविधाओं

की संभावनाओं का परीक्षण करने कहा। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को

निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित कार्य केवल निर्माण तक

सीमित न रहें, बल्कि उनके दीर्घकालिक रखरखाव, स्थानीय सहभागिता, रोजगार

सृजन और उपयोगिता को भी कार्ययोजना में शामिल किया जाए। उन्होंने योजनाओं

की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य

पूर्ण करने और प्रत्येक गतिविधि के स्पष्ट परिणाम सुनिश्चित करने पर जोर

दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा