गांजा तस्करी के चार आरोपियाें को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास व एक-एक लाख का अर्थदंड
काेंड़ागांव, 30 जुलाई (हि.स.)। जिले के बहुचर्चित गांजा तस्करी प्रकरण में काेंड़ागांव के विशेष न्यायालय ने आज गुरूवार काे फैसला सुनाते हुए फरसगांव निवासी कथित सरगना समेत चार आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। न्यायालय के इस फैसले को जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है।
प्रकरण के संबध में मिली जानकारी के अनुसार 26 मई 2024 को तत्कालीन एसडीओपी अनिल कुमार विश्वकर्मा एवं थाना प्रभारी नरेश साहू के नेतृत्व में फरसगांव पुलिस टीम ने एनएच-30 स्थित बिजली कार्यालय के सामने वाहन जांच के दौरान 10 चक्का ट्रक क्रमांक सीजी 04-जेसी- 9732 को रोककर तलाशी ली थी। जांच में ट्रक के केबिन और डाला के बीच विशेष रूप से बनाए गए गुप्त चेंबर से 110.570 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया था। पुलिस की सतर्कता और सुनियोजित कार्रवाई से अंतरराज्यीय गांजा तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय (स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985) कोण्डागांव में हुई। विशेष न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों, जब्ती पंचनामा, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। दोषियों में सुब्रत राय उर्फ सुबो (फरसगांव, कोण्डागांव), सतीश चन्द्र प्रजापति (हाथरस, उत्तर प्रदेश), शुभम सिंह पटेल (चित्रकूट, उत्तर प्रदेश) तथा परमेश्वर खीला (मलकानगिरी, ओडिशा) शामिल हैं। न्यायालय ने चारों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(ii)(सी) के तहत 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूकमणी मरकाम ने प्रभावी पैरवी की। वहीं लोक अभियोजक हेमंत गोस्वामी ने बताया कि फरसगांव पुलिस की सशक्त विवेचना, तत्कालीन एसडीओपी अनिल कुमार विश्वकर्मा एवं थाना प्रभारी नरेश साहू के नेतृत्व में की गई प्रभावी कार्रवाई तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जो मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध कड़ा संदेश देने वाला निर्णय माना जा रहा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे