वन मंत्री केदार कश्यप ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व जंगल सफारी का किया वर्चुअल शुभारंभ

 


बीजापुर , 01 नवंबर (हि.स.)। जिले के भोपालपटनम क्षेत्र अंतर्गत ग्राम उल्लूर में आज रविवार को इंद्रावती टाइगर रिजर्व जंगल सफारी का वर्चुअल शुभारंभ छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने किया।

जंगल सफारी की शुरुआत को क्षेत्र में पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे भोपालपटनम क्षेत्र को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस पहल से लगभग तीस वर्ष बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों और जैव विविधता को देखने के लिए पर्यटकों को नया अवसर मिलेगा। साथ ही पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं को रोजगार तथा ग्रामीणों को आजीविका के नए साधन उपलब्ध होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा, उपाध्यक्ष पेरे पुल्लैया, जनपद पंचायत अध्यक्ष सरिता कूड़ेम, उपाध्यक्ष नीलम गणपत, अल्पसंख्यक मोर्चा जिला अध्यक्ष फारुख खान, भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष मुरली चांडक, जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष टी. गोवर्धन एवं भाजपा मंडल मंत्री साईकृष्णा चेट्टी सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।वहीं प्रशासनिक एवं वन विभाग के अधिकारियों में जिला कलेक्टर विश्वदीप, वन विभाग के सीसीएफ, वन मंडल अधिकारी तथा बीजापुर पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बीजापुर जिले में बीते 31 मार्च को नक्सलवाद के खात्मे के बाद बीजापुर जिले में शांति एवं विकास के द्वार खुल गए हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत होने से जिले की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। वहीं स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे। इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया तथा वर्ष 1982-83 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया। रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर एवं 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल, ऊदबिलाव सहित भारतीय गिद्ध एवं सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसे दुर्लभ वन्यजीव एवं पक्षी पाए जाते हैं।

प्रथम चरण में उल्लूर गांव से उंडलापर्ती तक लगभग 09 किलोमीटर का मार्ग जंगल सफारी के लिए निर्धारित किया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए 04 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, तथा सफारी का शुल्क 02 हजार रुपये तय किया गया है। भविष्य में पर्यटकों की संख्या एवं पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के अनुरूप वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जंगल सफारी के दौरान प्रशिक्षित स्थानीय गाइड पर्यटकों को वन्यजीवों, जैव विविधता एवं प्राकृतिक विशेषताओं की जानकारी देंगे। इसके लिए 06 स्थानीय युवाओं को गाइड एवं सफारी वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। सफारी गेट के समीप पारंपरिक मिट्टी के घरों की थीम पर जलपान गृह की व्यवस्था भी की गई है, जहां पर्यटक ग्रामीण परिवेश में स्थानीय व्यंजनों एवं जलपान का आनंद ले सकेंगे।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत होने से स्थानीय युवाओं एवं ग्रामीणों के लिए गाइड, वाहन चालक, होम स्टे, खान-पान एवं पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन, जनजातीय कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। भविष्य में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अन्य क्षेत्रों में भी जंगल सफारी शुरू करने की योजना है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत बीजापुर जिले के बदलते परिवेश और विकास की नई दिशा को प्रदर्शित करती है। इससे जहां पर्यटकों को बस्तर की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा, वहीं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी नई गति प्राप्त होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे