जांजगीर में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: जेसीबी से तीन मकान ढहाए, ग्रामीणों के विरोध के बाद रुका अभियान
जांजगीर-चांपा, 04 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के अफरीद मुड़पार क्षेत्र में शनिवार अलसुबह वन विभाग ने कथित वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ी कार्रवाई की। सुबह करीब 4 बजे वन विभाग की टीम पुलिस बल और प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीन की मदद से तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में फॉरेस्ट गार्ड और पुलिस जवान तैनात रहे। हालांकि जैसे ही ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विरोध शुरू किया, स्थिति तनावपूर्ण हो गई और अंततः वन विभाग को कार्रवाई रोकनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार, वन विभाग का कहना है कि अफरीद मुड़पार क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया था। विभाग ने पहले ही इस मामले में 18 मकान मालिकों को नोटिस जारी किया था। नोटिस अवधि पूरी होने के बाद विभाग ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की और तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालांकि इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग ने सुबह अंधेरे में कार्रवाई शुरू कर दी, जबकि जिला प्रशासन के कई अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। दावा किया जा रहा है कि जिला कलेक्टर समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को इस कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं थी। वहीं स्थानीय थाना को भी पहले से इसकी जानकारी नहीं दिए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे कार्रवाई को लेकर विवाद और गहरा गया है।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे अमानवीय बताया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मकानों को हटाना ही था तो बरसात शुरू होने से पहले पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था ताकि प्रभावित परिवार वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। उनका आरोप है कि भारी बारिश के मौसम में मकान तोड़े जाने से कई परिवार बेघर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग ने संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करने के बजाय तड़के सुबह जेसीबी चलाकर लोगों को परेशानी में डाल दिया। विरोध बढ़ने और माहौल तनावपूर्ण होने के बाद वन विभाग को फिलहाल कार्रवाई रोकनी पड़ी।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। वन विभाग का कहना है कि नोटिस जारी करने के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की गई है, जबकि ग्रामीण और जनप्रतिनिधि इस कार्रवाई की प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और वन विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार/लालिमा शुक्ला पुरोहित
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हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT