वन अधिकार अधिनियम के लिए तकनीकी सहयोगी संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित
25 सितंबर तक आवेदन का मौका, संस्था को वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव जरूरी
बलरामपुर, 18 सितंबर (हि.स.)। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) के तहत वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले के चयनित गांवों में तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने तकनीकी सहयोगी संस्था, सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशन और स्थानीय संस्थाओं के चयन के लिए यह प्रक्रिया शुरू की है।
चयनित संस्था को ग्राम सभाओं के साथ काम करते हुए विभागीय योजनाओं के माध्यम से आजीविका संवर्धन और वन प्रबंधन में सहयोग करना होगा। इसके अलावा सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की मान्यता के लिए दावा निर्धारण, पारंपरिक सीमाओं के सीमांकन एवं मानचित्रण तथा सामुदायिक वन संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों में तकनीकी सहयोग देना होगा।
आवेदन करने वाली संस्था का सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 या राज्य सोसायटी पंजीकरण के तहत पंजीकृत सोसायटी, सार्वजनिक ट्रस्ट अथवा कंपनी अधिनियम 2013 के तहत गैर-लाभकारी संस्था होना जरूरी है। संस्था का गत वर्ष तक का वित्तीय ऑडिट पूर्ण होना चाहिए। इसके साथ ही नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण और छत्तीसगढ़ के किसी जिले या विकासखंड में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव भी अनिवार्य किया गया है।
इच्छुक एवं पात्र संस्थाएं निर्धारित मापदंडों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर 25 सितंबर 2026 को शाम 5:30 बजे तक आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। आवेदन कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, बलरामपुर-रामानुजगंज में उपस्थित होकर जमा करना होगा।
विस्तृत जानकारी जिले के सूचना पटल और जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय