कृषि सूचना केंद्र के आयोजन में नवीन कृषि तकनीकों से किसानों को किया जागरूक

 


जगदलपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। कुम्हारवंड स्थित शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम के छात्रों द्वारा ग्राम पंचायत कुम्हारावंड में कृषि सूचना केंद्र का आयोजन किया गया। गुरूवार को आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों के बीच वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार करना और कृषि छात्रों तथा ग्रामीण परिवेश के बीच संवाद को सुदृढ़ बनाना था।

कार्यक्रम केमुख्य अतिथि के रूप में शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के अधिष्ठाता डॉ आरएस नेताम उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में सहायक संचालक अनुसंधान डॉ. अश्वनी ठाकुर, कीट वैज्ञानिक डॉ. नेमीचंद मंडावी और रावे समन्वयक डॉ. जेएल सलाम शामिल हुए। कुम्हारावंड की ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी रेवती ध्रुवे, कृत्रिम गर्भाधान केंद्र के प्रभारी अमन तिवारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में पंच पीतांबर विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छात्रों के मेजबान कृषक वेद प्रकाश पांडे, जया जोशी, टेकाम जोशी, अजयस्वर जोशी, अभिषेक जोशी सहित बड़ी संख्या में संपर्क किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया।

मंच से विशेषज्ञों ने उपस्थित जनसमूह और छात्रों को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिष्ठाता डॉ. आरएस नेताम ने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि एक सफल कृषि विशेषज्ञ बनने के लिए ग्रामीण परिवेश में खुद को ढालना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं और उनकी समस्याओं को समझें तथा उसी के आधार पर अपने कृषि कार्य व शोध को आगे बढ़ाएं।

खरीफ सीजन की मुख्य फसल को ध्यान में रखते हुए डॉ अश्वनी ठाकुर ने उपस्थित किसानों को धान की फसल में खरपतवार (नदाव) नियंत्रण के वैज्ञानिक और प्रभावी उपाय विस्तार से बताए, ताकि फसल की उत्पादकता सुरक्षित रहे। वहीं कीट वैज्ञानिक डॉ नेमीचंद मंडावी ने फसलों पर लगने वाले विभिन्न हानिकारक कीटों एवं बीमारियों पर प्रकाश डालते हुए जैविक और रासायनिक दोनों पद्धतियों से बचाव के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी। रावे समन्वयक डॉ जेएल सलाम ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है, बल्कि कृषि विद्यार्थियों के भविष्य और उनके व्यावहारिक कौशल को गढ़ने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

कृषि सूचना केंद्र के दौरान रावे के छात्र-छात्राओं ने किसानों को व्यावहारिक रूप से कृषि की बारीकियां समझाने के लिए कई जीवंत (लाइव) मॉडल और प्रदर्शनियां भी लगाईं। छात्रों द्वारा प्रस्तुत प्रमुख मॉडलों में कम लागत में अतिरिक्त आय अर्जित करने हेतु मशरूम उत्पादन मॉडल, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने हेतु जैव उर्वरक एवं ट्राइकोडर्मा की जानकारी, तथा फसलों के सुरक्षित कीट नियंत्रण के लिए विभिन्न प्रकार के लाइट व फेरोमोन ट्रैप, मधुमक्खी पालन के छत्ते और कीटनाशकों के सुरक्षित छिड़काव से संबंधित उपकरण शामिल थे। इसके अतिरिक्त, छात्रों ने पीआरए (सहभागिता ग्रामीण मूल्यांकन) के माध्यम से तैयार किए गए सूचनात्मक पोस्टरों को प्रदर्शित कर ग्रामीणों को गांव के कृषि संसाधनों, समस्याओं और उनके वैज्ञानिक समाधानों को सरल भाषा में समझाया।

इस पूरे आयोजन को सफल और सुचारू रूप से संचालित करने में महाविद्यालय के प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों- डॉ. भूजेंद्र कुमार, डॉ. राजा राम, डॉ. देवचंद सलाम और डॉ. थानेश्वर कुमार ने अपनी महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीणों में पोषण-बाड़ी और फल एवं बागान आधारित खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम के अंत में मेजबान और संपर्क किसानों को आम, नारियल और मुनगा के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे