लजकुरहीन माता की पूजा कर किसानों ने मांगी खुशहाली, बेहतर फसल की कामना

 


धान की गाबोध स्थिति पर ग्राम देमार में निभाई गई वर्षों पुरानी परंपरा

धमतरी, 06 सितंबर (हि.स.)। अंचल में धान की मताई-रोपाई के बाद अब खेतों में फसल तेजी से तैयार होने लगी है। कई खेतों में धान की बालियां निकल आई हैं और फसल में दूध भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। धान की गाबोध स्थिति को किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी अवसर पर ग्रामीण अपनी ग्राम आराध्य देवी लजकुरहीन माता की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल, भरपूर पैदावार और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

धमतरी शहर से लगे ग्राम पंचायत देमार में रविवार को खेत के खार में स्थित लजकुरहीन माता के मंदिर स्थल पर ग्रामीणों ने विधिविधान से पूजा-अर्चना की। पंडित खिलावन प्रसाद शर्मा की अगुवाई में पूजा-पाठ की क्रियाएं संपन्न कराई गईं। ग्रामीणों ने फूल, अक्षत, गुलाल, धूप-अगरबत्ती और दीप प्रज्वलित कर माता की आराधना की तथा क्षेत्र में खुशहाली और किसानों के घरों में अन्न-धन की समृद्धि की कामना की। ग्राम विकास समिति के कोषाध्यक्ष दिनेश कुमार साहू ने बताया कि भादो मास में जब खेतों में तैयार हो रही धान की फसल में दूध भरने लगता है, तब लजकुरहीन माता की पूजा करने की परंपरा है। यह पर्व वर्षों से ग्रामीणों द्वारा आस्था और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है।

ग्रामीणों का मानना है कि माता की कृपा से फसल अच्छी होती है और गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति में प्रकृति और कृषि से जुड़े पर्वों का विशेष महत्व है। खेतों में फसल की हर अवस्था को प्रकृति और देवी-देवताओं के प्रति कृतज्ञता से जोड़ा गया है। लजकुरहीन माता की पूजा भी इसी कृषि परंपरा और लोकआस्था का प्रतीक है, जहां किसान मेहनत के साथ प्रकृति की कृपा की कामना करते हैं। पूजा के अवसर पर ग्राम विकास समिति के महासरक्षक खोरबाहरा राम साहू, अध्यक्ष शीत कुमार साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश कुमार साहू, उपाध्यक्ष बसंत मीनपाल, सरपंच विमलेश मीनपाल, पंच ध्रुव बैगा, गोपाल यादव, सुरेश साहू, सेवादार ओमप्रकाश साहू, रघुवीर रामटेक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा