खेतों में पराली जला रहे किसान, पर्यावरण हो रहा प्रदूषित

 


धमतरी, 05 जून (हि.स.)। विकासखंड कुरुद के कई गांवों में इन दिनों किसान फसल कटाई के बाद खेतों पराली जला रहे हैं। इससे चारों ओर धुआं ही धुआं उड़ रहा है। खेतों में लगी आग का दृश्य देखकर ग्रामीणों ने इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने की मांग की है।

ग्राम पचपेड़ी के खेत सहित अन्य गांव में किसान पराली जला रहे हैं। खेतों से आग की लपटें उठ रही है।

आसमान में फैलता धुआं न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि आसपास के किसानों की फसलों और संपत्तियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खेतों में फसल कटाई के बाद बची पराली को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे बड़ी मात्रा में धुआं फैल गया। तेज गर्मी और शुष्क मौसम के बीच इस तरह की घटनाएं कभी भी बड़े अग्निकांड का रूप ले सकती हैं। आग की वजह से खेतों की ऊपरी उपजाऊ मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणु और पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है।

ग्रामीण नरेश कुमार और सोहन साहू ने कहा कि खेतों में इस तरह आग लगाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, पशु-पक्षियों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि पराली के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन के उपाय अपनाए जाएं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पराली को जलाने के बजाय उसे खेतों में मिलाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और उत्पादन लागत में भी कमी आती है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा