मशीन से धान रोपाई कर बड़े मारेंगा के किसान चंदन ने बचाए एक लाख रुपये

 


जगदलपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। आधुनिक कृषि उपकरणों से किसानों को अब खेती-किसानी के लिए काफी सहूलियत मिल रही है और बस्तर के किसान भी इन उन्नत कृषि यंत्रों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं, जो किसानों के लिए श्रमिकों की किल्लत को दूर करने में सहायक साबित हो रहे हैं।

तोकापाल विकासखण्ड के बड़ेमारेंगा निवासी किसान चंदन कश्यप कहते हैं, कि मानसून आते ही धान बुवाई कार्य को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। वजह थी, उनकी 17 एकड़ कृषि भूमि में धान रोपाई के लिए मजदूरों का न मिलना। बल्कि मजदूरों की व्यवस्था करने में मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता था। इस भारी भागदौड़ और सात से आठ हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से केवल मजदूरी पर ही उनके डेढ़ लाख रुपये स्वाहा हो जाते थे। कमाई तो बाद की बात थी, रोपाई की शुरुआत में ही जेब खाली हो जाती थी।

पहली बार 'पैडी ट्रांसप्लांटर' यानी धान रोपाई मशीन को अपने खेतों में उतारने का फैसला किया। जैसे ही छोटी सी पेट्रोल चालित मशीन ने कीचड़ से सने खेतों में कदम रखा, दूर-दराज के गांवों से मजदूर लाने की मजबूरी हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गई। परिवार के ही 4 से 5 सदस्यों ने कंधे से कंधा मिलाया और मशीन थामकर पूरे 17 एकड़ खेत में रोपाई का कार्य संभाल लिया। देखते ही देखते, जलभराव वाले एक-डेढ़ एकड़ के छोटे से हिस्से को छोड़कर पूरी ज़मीन पर हरी-भरी पौध की सलीकेदार कतारें सज गईं। जब रोपाई का काम पूरा हुआ और चंदन ने कुल खर्च का हिसाब लगाया, तो उनकी आंखें खुशी से चमक उठीं। जहां पहले डेढ़ लाख रुपये सिर्फ मजदूरी में बह जाते थे, वहीं इस बार केवल पेट्रोल का मामूली सा खर्च आया और सीधे तौर पर लगभग 1 लाख रुपये की भारी-भरकम बचत हो गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे