नक्सलवाद के खात्में के बाद भी अबूझमाड़ की विकास यात्रा बड़ी चुनौती
नारायणपुर, 06 सितंबर (हि.स.)। जिले अबूझमाड़ इलाके से नक्सलवाद के खात्में के बाद विकास पहुंचाने की कोशिश तो हो रही है, लेकिन अब भी ऐसे कई गांव हैं, जहां के लोग दैनिक सामग्री के लिए ग्रामीणाें काे कई किलोमीटर का सफर तय कर बाजार तक पहुंचना पड़ता है। अबूझमाड़ में मूलभूत आवश्यकता सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं अब भी दूर है।
सरकार और प्रशासन अब उन इलाकों तक विकास पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां कभी पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती हुआ करता था। लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि अबूझमाड़ की विकास यात्रा अभी लंबी है। आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां राशन, नमक, तेल और अन्य दैनिक जरूरत की सामग्री भी नहीं मिलती।
नारायणपुर के खाद्य अधिकारी अलाउद्दीन खान द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बारिश से पूर्व ही ग्रामीणों को 3 से 4 माह का राशन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बारिश में उन्हें परेशानी ना हो।
अबूझमाड़ के कुतुल में लगने वाला साप्ताहिक बाजार आस-पास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा की तरह है। कुतुल के साप्ताहिक बाजार में हमें अबूझमाड़ की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई दीं। पहली तस्वीर वह ग्रामीण जो आज भी 15 से 30 किलोमीटर और कई मामलों में 40 किलोमीटर तक पैदल चलकर बाजार पहुंच रहे हैं।
ग्रामीणाें का कहना है कि गांव तक आज भी पक्की सड़क नहीं पहुंची है। स्कूल भवन तो है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार शिक्षक नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे। लेकिन दूसरी तस्वीर भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, युवतियां जो अब बिना भय के निकल रही हैं। लेकिन कुतुल के साप्ताहिक बाजार और वहां मिले ग्रामीणों की कहानी बताती है कि असली चुनौती अभी बाकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे