रायगढ़ जिले में प्रस्तावित रेल परियोजना में विलंब होने से ग्रामीणों में नाराजगी
रायगढ़ , 28 सितंबर (हि.स.)। रायगढ़ जिले में प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर आसपास के करीब 24 /25 गांवों के किसानों और जमीन मालिकों की परेशानियां आज भी जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कारण इन गांवों में जमीन की खरीद -बिक्री, बंटवारा, डायवर्शन और अन्य राजस्व संबंधी कार्य आज भी पूरी तरह से प्रभावित हैं। करीब पांच महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। जमीन मालिकों को लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बहुत से ग्रामीणों के आवेदन विभिन्न राजस्व कार्यों के लिए न्यायालयों में अटके पड़े हुए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, परियोजना के लिए प्रभावित होने वाली जमीन और खसरों की अंतिम स्थिति स्पष्ट किए बिना संबंधित गांवों में राजस्व कार्यों पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय स्तर पर जमीन मालिकों को बताया जा रहा है कि प्रशासनिक आदेश के कारण फिलहाल जमीन से जुड़े कई कार्य नहीं किए जा सकते।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि प्रस्तावित रेल लाइन केवल कुछ विशेष खसरों से होकर गुजरनी है, तो पूरे गांव की जमीन को प्रतिबंधित रखने के बजाय इतना अधिक समय निकल जाने के बाद प्रभावित भूमि की पहचान कर उसी पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रायगढ़ तहसील के कुशवाबहरी, उर्दना, आमापाल, लामीदरहा, गढ़कुरी, गोवर्धनपुर, कोतरलिया, पतरापाली और कोटमार तथा खरसिया तहसील के तिऊर, तुरेकेला, परसकोल, औरदा, ठूसेकेला, मदनपुर, भेलवांडीह, बानीपाथर, रजघटा, छोटे डूमरपाली, बड़े डूमरपाली, गिनडोला, नहरपाली, सिंघनपुर, बिलासपुर और भूपदेवपुर गांवों की जमीनों से संबंधित राजस्व कार्यों पर प्रतिबंध की बात सामने आई है।राज्य और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के तहत प्रस्तावित अधिग्रहण वाली भूमि के क्रय-विक्रय, रहन, अंतरण, बटांकन, अपवर्तन और बंटवारे पर रोक का उल्लेख किया गया है। जिससे कॉलोनियों और जमीन कारोबार पर भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
ज्ञात हो कि रायगढ़ शहर के आसपास के कुछ प्रभावित गांवों में पहले से छोटी-बड़ी कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। जमीन कारोबार से जुड़े लोगों के बताए अनुसार आने वाले त्यौहारी मौसम जो कि अक्तूबर (नवरात्रि)से प्रारंभ होकर लगभग दिसंबर(क्रिसमस) तक मात्र दो महीने का ही समय काल होता है जिसमें सभी प्रकार के व्यपारी साल भर का 50 प्रतिशत कारोबार करते है। जिनके पास अधिकांश पैसा रियल स्टेट कारोबार से ही आता है। इस बीच जिले के 25 गांवों में राजस्व प्रक्रिया प्रभावित होने से इन क्षेत्रों में जमीनों की खरीद-बिक्री और डायवर्शन की प्रक्रिया जिस तरीके से अटक गई है। उससे लगता है कि यदि यह प्रतिबंध जल्दी नहीं हटा तो आने वाला त्योहारी सीजन और पूरा साल जिले के कारोबारियों के लिए पूरी तरह से निराशा जनक होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान