छत्तीसगढ़ में बिजली हुई महंगी, घरेलू उपभोक्ताओं पर 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि
नियामक आयोग ने 24 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव को घटाकर 6.23 प्रतिशत किया
रायपुर, 15 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। नए टैरिफ के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी होगी, जबकि गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट अधिक भुगतान करना होगा। कृषि पंपों के लिए भी बिजली दर में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है।
हालांकि आयोग ने वितरण कंपनी की ओर से प्रस्तावित 24 प्रतिशत की वृद्धि को स्वीकार नहीं किया और औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि को ही मंजूरी दी है। आयोग का कहना है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ सीमित रखने के साथ वितरण कंपनी की वित्तीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
राजधानी रायपुर में साेमवार काे आयोजित पत्रकारवार्ता में आयोग के कानून सदस्य विनोद गनोदवाले, तकनीकी सदस्य अजय कुमार सिंह और सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला ने बताया कि वितरण कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए 38,729 मिलियन यूनिट बिजली बिक्री और 32,520 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव रखा था। आयोग ने परीक्षण के बाद 39,760 मिलियन यूनिट बिजली बिक्री और 28,348 करोड़ रुपये की राजस्व आवश्यकता को मंजूरी दी है।
वितरण कंपनी ने अपनी याचिका में 6,304 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का दावा किया था। आयोग ने जांच के बाद केवल 1,662 करोड़ रुपये के घाटे को मान्य माना। इसी आधार पर बिजली दरों में अपेक्षाकृत सीमित वृद्धि का फैसला लिया गया। आयोग के अनुसार बिजली आपूर्ति की औसत लागत 7.13 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है, जबकि वर्तमान टैरिफ के आधार पर औसत बिलिंग दर 6.71 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई है। यानी प्रति यूनिट 42 पैसे का अंतर अभी भी बना हुआ है।
कृषि पंपों के लिए बिजली दर में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शनों को ऊर्जा प्रभार में मिलने वाली छूट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है।
आयोग ने किसानों को खेतों में लगे पंपों के पास 100 वॉट तक प्रकाश और पंखे के उपयोग की पहले से मिल रही सुविधा भी जारी रखने का फैसला किया है। इसे किसानों के हित में महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों, बस्तर और सरगुजा के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से हटाकर घरेलू श्रेणी में रखा गया है। इससे उनके बिजली बिलों में कमी आने की संभावना है।
इसी तरह स्थानीय निकायों के कार्यालयों तथा छत्तीसगढ़ आवास मंडल की कॉलोनियों की स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक जल आपूर्ति कनेक्शनों को भी अपेक्षाकृत सस्ती घरेलू श्रेणी में स्थानांतरित किया गया है।
आयोग ने बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित मोबाइल टावरों को ऊर्जा शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है। वहीं महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को ऊर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट जारी रखी गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों तथा आदिवासी अंचलों में संचालित अस्पतालों, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक केंद्रों को भी बिजली शुल्क में मिल रही 10 प्रतिशत की रियायत बरकरार रखी गई है।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों के लिए विशेष टैरिफ जारी रखा गया है। निम्नदाब उपभोक्ताओं के लिए यह दर 7.13 रुपये प्रति यूनिट और उच्चदाब श्रेणी में 6.42 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है।
सौर ऊर्जा परियोजनाओं को भी प्रोत्साहन दिया गया है। अक्टूबर 2026 तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने वाली कुछ परियोजनाओं को सात वर्षों तक पारेषण शुल्क में आंशिक छूट का लाभ मिलेगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
नई दरों के बाद घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ेंगे, लेकिन आयोग ने वितरण कंपनी की मांग की तुलना में वृद्धि को काफी सीमित रखा है। दूसरी ओर समय आधारित टैरिफ (टीओडी), इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, सौर ऊर्जा और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए विशेष प्रावधानों के जरिए ऊर्जा दक्षता और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है। नई बिजली दरें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लागू होंगी और इसका असर राज्य के लाखों उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर दिखाई देगा।
हिन्दुस्थान समाचार / चन्द्र नारायण शुक्ल