विपरीत-चक्रवात का असर: धमतरी में हल्की बारिश, किसानों की बढ़ी चिंता

 


धमतरी, 23 फ़रवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के ऊपर बने विपरीत-चक्रवातीय प्रभाव के चलते बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाएं अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ रही हैं। दो विपरीत दिशाओं की हवाओं के संगम से बने प्रभाव क्षेत्र के कारण धमतरी जिले में पिछले दो दिनों से हल्की बारिश और बूंदाबांदी का दौर जारी है। मौसम में आए इस बदलाव ने जहां जनजीवन पर आंशिक असर डाला है, वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है।जिले के धान संग्रहण केंद्रों में बड़ी मात्रा में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान रखा हुआ है। लगातार हो रही बूंदाबांदी से धान के भीगने की आशंका बनी हुई है। यदि पर्याप्त सुरक्षा और ढंकाव की व्यवस्था नहीं की गई तो गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा उपायों के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन मौसम की अनिश्चितता से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इधर, बदले मौसम का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में नमी बढ़ने से सर्दी, खांसी और वायरल संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। चिकित्सकों ने लोगों को सावधानी बरतने और मौसम के अनुरूप खानपान व दिनचर्या अपनाने की सलाह दी है। सबसे अधिक चिंता किसानों को सता रही है। इन दिनों जिले के चारों विकासखंड धमतरी, नगरी, कुरूद और मगरलोड में किसान उन्हारी फसलों को सहेजने में जुटे हुए हैं। कई खेतों में चना, मूंग और सरसों की फसल पकने की अवस्था में है, जबकि कुछ स्थानों पर कटाई की तैयारी चल रही है। ऐसे समय में हल्की बारिश भी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। दानों में नमी बढ़ने से दाग लगने और उपज घटने की आशंका बनी रहती है।

कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर ही करें दवा का छिड़काव-

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. शक्ति वर्मा ने बताया कि बदले हुए मौसम में तैयार चना, मसूर और सरसों की फसलों में कीट प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। नमी के कारण फसल में फफूंद और कीड़े लग सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे फसलों की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर ही दवा का छिड़काव करें। मौसम के इस बदलते मिजाज ने एक बार फिर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। अब सभी की निगाहें आगामी दिनों के मौसम पर टिकी हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा