बस्तर के स्कूलों में इको क्लब' शुरू करेंगे 'ग्रीन समर कैंप', 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान

 


जगदलपुर, 04 जून (हि.स.)। विश्व पर्यावरण दिवस के विशेष अवसर पर जिले में कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशन में पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता को लेकर एक अनूठी पहल शुरू की गई है। जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में स्थापित इको क्लबों द्वारा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विविध गतिविधियों की शुरुआत की जा रही है।

राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ और भारत सरकार के निर्देशानुसार यह पूरा आयोजन मिशन लाइफ के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, सतत जीवनशैली और जलवायु परिवर्तन के प्रति जिम्मेदारी व जागरूकता का भाव विकसित करना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्राथमिकताओं के भी पूरी तरह अनुरूप है।

इस अभियान को वृहद रूप से बस्तर जिले के सभी स्कूलों में 5 जून से 30 सितंबर 2026 तक एक पेड़ माँ के नाम 3.0 व्यापक वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक शाला को दिए गए निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पौधे लगाए जाएंगे और पिछले वर्षों की तरह इस सत्र में भी रोपे गए पौधों के जीवित रहने व उनकी नियमित देखरेख की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। यदि स्कूल परिसर में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होगी, तो छात्र अपने घर, सड़क किनारे या किसी भी उपयुक्त सार्वजनिक स्थान पर पौधे लगा सकेंगे।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की मुख्य थीम जलवायु परिवर्तन निर्धारित की गई है। इस गंभीर विषय पर छात्रों को संवेदनशील बनाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी सह जिला परियोजना अधिकारी (समग्र शिक्षा, माध्यमिक) बस्तर के मार्गदर्शन में एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत विद्यालयों में वृक्षारोपण, सीड बॉल निर्माण, स्वच्छता अभियान, पक्षी व जल संरक्षण, जैव विविधता अध्ययन और पर्यावरण शपथ जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जहां छात्रों ने उत्साहपूर्वक एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधारोपण कर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया है। पर्यावरण के प्रति इस जागरूकता को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर जिले के सभी स्कूलों में 05 जून से 30 जून तक ग्रीन समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है।

इस कैंप के माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रकृति से जोड़ने के लिए सात मुख्य विषयों पर आधारित व्यावहारिक और मनोरंजक गतिविधियां कराई जाएंगी। इसके अंतर्गत छात्र प्रकृति की गोद में वॉक के जरिए स्थानीय पारिस्थितिकी को समझेंगे, स्कूलों में किचन गार्डन का निर्माण करेंगे और मिलेट आधारित प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। इसके साथ ही, पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित निपटान के लिए ई-कचरा कलेक्शन पॉइंट बनाना, कक्षाओं में गीले और सूखे कचरे के लिए टू-बिन सिस्टम लागू करना तथा कंपोस्ट पिट तैयार करना भी इस अभियान का हिस्सा है। ऊर्जा और पानी की बचत के लिए स्कूलों में बाकायदा ऑडिट किए जाएंगे और सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह अलविदा कहकर स्टील टिफिन व जूट बैग अपनाने के लिए स्थानीय समुदाय को प्रेरित किया जाएगा। ये गतिविधियां नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जवाबदेह बनाएंगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे