अंबिकापुर की बेटी डॉ. ज्योति साहू को राष्ट्रीय 'सी वेट एक्सीलेंस अवार्ड', पशु चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान
अंबिकापुर, 15 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लिए यह बेहद गौरव का क्षण है, जब यहां की अनुभवी पशु चिकित्सा सर्जन डॉ. ज्योति साहू (पीएचडी) को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान “डॉ. शक्कुबाई रामचंद्रन She-VET एक्सीलेंस अवार्ड 2026” से नवाजा गया है। पशु चिकित्सा और पशुपालन विज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए मिला यह पुरस्कार न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि इससे पूरे प्रदेश के पशुधन विकास विभाग और साहू समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई है।
वर्तमान में अंबिकापुर विकासखंड की प्रभारी के रूप में सेवाएं दे रही डॉ. ज्योति पिछले 11 वर्षों से पशु चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं। उनके पास फील्ड के जमीनी अनुभव के साथ-साथ गहन वैज्ञानिक शोध की पृष्ठभूमि भी है, जिसने उन्हें पशु कल्याण और आधुनिक उपचार पद्धतियों के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
डॉ. साहू की कार्यशैली सेवा, अनुसंधान और कुशल नेतृत्व का एक अनूठा संगम पेश करती है। उन्होंने शासन की योजनाओं को महज फाइलों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारा है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण उनके द्वारा बालोद जिले के कुसुमकसा गांव में स्थापित 'दूध संग्रहण सह शीतलन केंद्र' है। इस केंद्र ने स्थानीय दुग्ध उत्पादकों के लिए बाजार की राह आसान कर उन्हें उचित मूल्य दिलाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।
उनके इसी समर्पण का परिणाम है कि वे ब्लॉक और जिला स्तर पर पशु मेलों और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से हजारों पशुपालकों का जीवन संवारने में सफल रही हैं। गौरतलब है कि उनकी प्रतिभा को पहले भी राष्ट्रीय मंच पर सराहा जा चुका है; वर्ष 2015 में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मुर्गियों के आहार एवं पोषण (पोल्ट्री न्यूट्रिशन) पर उनके उत्कृष्ट शोध के लिए उन्हें सम्मानित किया था।
डॉ. ज्योति साहू की इस सफलता के पीछे एक समृद्ध पारिवारिक और सांस्कृतिक विरासत भी है। वे उतई नगर साहू समाज के प्रथम अध्यक्ष स्वर्गीय चोवाराम साहू के ज्येष्ठ नाती डॉ. भीष्मदेव साहू की धर्मपत्नी हैं, वहीं उनके नाना खुमान साव को कला के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। राजनांदगांव निवासी कविता और अमृत लाल साहू की पुत्री डॉ. ज्योति ने अपनी मेहनत से विरासत के इस गौरव को और भी बढ़ाया है।
आज उनकी यह उपलब्धि पशुपालन एवं पशु चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सेवा भाव के साथ कार्य किया जाए, तो ग्रामीण विकास की तस्वीर बदली जा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह