ग्राम सभाओं में किसानों के सामने पढ़ी जा रही डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जानकारी, दावा-आपत्ति का भी मिल रहा अवसर

 


रायगढ़, 01 नवंबर (हि.स.)। खरीफ वर्ष 2026-27 के अंतर्गत किए गए डिजिटल क्रॉप सर्वेक्षण एवं पी.व्ही.एप के माध्यम से फसल गिरदावरी की जानकारी अब ग्राम सभाओं में किसानों के सामने रखी जा रही है। जिले की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन कर डीसीएस के प्रथम एवं द्वितीय चरण में दर्ज फसल संबंधी प्रविष्टियों का सार्वजनिक रूप से वाचन किया जा रहा है। साथ ही सर्वेक्षण से संबंधित सूचियां ग्राम पंचायतों में अवलोकन के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि किसान अपनी फसल एवं खसरा संबंधी दर्ज जानकारी का मिलान कर सकें।

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने डीसीएस फसल सर्वेक्षण की जानकारी ग्राम सभाओं में किसानों को उपलब्ध कराने तथा प्राप्त दावा-आपत्तियों का 10 नवंबर तक निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

इसी क्रम में रायगढ़ तहसील के ग्राम पंचायत बड़े अतरमुड़ा में रविवार काे आयोजित विशेष ग्राम सभा का अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रायगढ़ द्वारा निरीक्षण किया गया। इस दौरान डीसीएस सूची एवं पी.व्ही.एप सर्वे सूची का वाचन किया गया तथा किसानों से फसल सर्वेक्षण के संबंध में दावा-आपत्तियां प्राप्त की गईं। इसी तरह पुसौर तहसील के ग्राम पंचायत रुचिदा, सेमरा एवं रावणखोंद्रा में भी ग्राम सभा के दौरान डीसीएस एवं पी.व्ही.एप में दर्ज फसल प्रविष्टियों का वाचन किया गया तथा सूचियां ग्राम पंचायत में ग्रामीणों के अवलोकन के लिए उपलब्ध कराई गईं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से यह प्रक्रिया संचालित की जा रही है। राजस्व अधिकारियों द्वारा ग्राम सभाओं के आयोजन एवं फसल सर्वेक्षण की जानकारी के वाचन का निरीक्षण किया जा रहा है।

विशेष ग्राम सभाओं का उद्देश्य फसल सर्वेक्षण में दर्ज जानकारी की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसानों को किसी प्रकार की त्रुटि होने पर दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर देना है। ग्राम सभा में फसल प्रविष्टियों का वाचन ग्रामीणों एवं किसानों की उपस्थिति में किया जा रहा है। प्राप्त दावा-आपत्तियों को संबंधित तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उनका परीक्षण कर निराकरण किया जाएगा।

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे विशेष ग्राम सभा में उपस्थित होकर अपने खेतों की फसल प्रविष्टियों एवं खसरा संबंधी जानकारी का अवलोकन अवश्य करें। किसी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर निर्धारित अवधि में दावा-आपत्ति प्रस्तुत करें, ताकि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले फसल सर्वेक्षण संबंधी जानकारी का परीक्षण कर आवश्यक सुधार किया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान