उरगा-कुसमुंडा बायपास के बावजूद शहर में मालगाड़ियों का दबाव, हर 15-20 मिनट में बंद हो रहे रेलवे फाटक

 


कोरबा, 23 सितम्बर (हि. स.)। कुसमुंडा खदान से कोयला परिवहन को सुगम बनाने और कोरबा शहर के भीतर से गुजरने वाली मुख्य रेल लाइन पर मालगाड़ियों का दबाव कम करने के उद्देश्य से बनाई गई उरगा-कुसमुंडा नई रेल लाइन एक साल बाद भी अपने अपेक्षित उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर सकी है।

करीब 13 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का ट्रायल 29 सितंबर 2025 को किया गया था और 7 अक्टूबर 2025 से इस पर मालगाड़ी परिचालन शुरू हो गया था। इसके बावजूद वर्तमान में नई लाइन से औसतन केवल 2 से 3 रैक कोयला प्रतिदिन भेजे जाने की स्थिति बताई जा रही है।

नई रेल लाइन के शुरू होने के समय उम्मीद थी कि कुसमुंडा खदान से निकलने वाली अधिकांश मालगाड़ियों को उरगा-कुसमुंडा बायपास के रास्ते रवाना किया जाएगा। इससे कोरबा शहर के बीच से गुजरने वाली पुरानी रेल लाइन पर मालगाड़ियों की आवाजाही कम हाेती और रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से शहरवासियों को राहत मिलती। लेकिन स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।

एसईसीएल की कुसमुंडा खदान से प्रतिदिन औसतन 7 से 9 रैक कोयला बाहर भेजा जाता है और लगभग इतने ही खाली रैक खदान की साइडिंग तक पहुंचते हैं।

इस तरह कुसमुंडा क्षेत्र से प्रतिदिन करीब 14 मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद इन सभी रैकों को नई रेल लाइन से संचालित नहीं किया जा रहा है। वहीं गेवरा और दीपका क्षेत्र से होने वाला कोयला डिस्पैच भी मुख्य रूप से पुराने रेल मार्ग पर निर्भर है। वर्तमान में कोरबा क्षेत्र से प्रतिदिन करीब 35 से 40 रैक कोयला भेजे जाने और इतनी ही संख्या में खाली रैक के खदानों की साइडिंग तक पहुंचने की बात सामने आ रही है।

नई रेल लाइन का पूरा उपयोग नहीं होने का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। कुसमुंडा और गेवरा की खदानों से निकलने वाली अधिकांश मालगाड़ियां आज भी कुसमुंडा-कोरबा-उरगा पुराने रेल मार्ग से होकर गुजर रही हैं। शहर के बीचों-बीच मालगाड़ियों की लगातार आवाजाही के कारण पुराना पवन टॉकीज रेलवे क्रॉसिंग और संजयनगर रेलवे क्रॉसिंग पर बार-बार फाटक बंद हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार महज 15 से 20 मिनट के अंतराल में रेलवे फाटक बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, मरीजों, रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों तथा चांपा और आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है।

पीक आवर में रेलवे फाटक बंद होने से सड़क यातायात बाधित होता है और लोगों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में शहरवासियों का सवाल है कि जब उरगा-कुसमुंडा बायपास रेल लाइन का निर्माण ही शहर के भीतर मालगाड़ियों का दबाव कम करने के उद्देश्य से किया गया है, तो इसका अपेक्षित उपयोग क्यों नहीं हो रहा है।

शहरवासियों की मांग है कि नई रेल लाइन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कर मालगाड़ियों को पुराने शहरी रेल मार्ग से कम से कम गुजारा जाए। इससे न केवल कोरबा शहर के रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से राहत मिल सकती है, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों, यात्रियों और रोजमर्रा के काम से आवागमन करने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार/हरीश तिवारी

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी