मूलभूत सुविधाओं की मांग, 50 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने घेरा धमतरी कलेक्ट्रेट

 




धमतरी, 22 जून (हि.स.)। आजादी के 79 वर्ष बाद भी सड़क, पुल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि अधिकार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे सीतानदी-उदंती क्षेत्र का आक्रोश सोमवार को सड़कों पर फूट पड़ा। जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति के आह्वान पर धमतरी और गरियाबंद जिले के 50 से अधिक गांवों से पहुंचे हजारों आदिवासी ग्रामीणों ने धमतरी कलेक्ट्रेट का घेराव करते हुए कलेक्ट्रेट मोड़ पर सड़क जाम कर धरना शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर आदिवासी क्षेत्रों की लगातार उपेक्षा और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों पर ठोस निर्णय होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। हालात तनावपूर्ण होने पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, एसपी सूरज सिंह परिहार समेत अन्य अधिकारी कड़े सुरक्षा घेरे के बीच पैदल चलकर प्रदर्शनकारी ग्रामीणों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनी। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने वर्षों से लंबित सड़क, पुल, विद्युतीकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं, भूमि अधिकार और वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांगों को प्रमुखता से उनके समक्ष रखी।

संघर्ष समिति के नरेश मांझी, मनोज साक्षी, श्रीधन सोम एवं बीरबल पदमाकर ने आरोप लगाया कि संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में विकास और अधिकारों को लेकर अपेक्षित काम नहीं हुआ है। अधिकारियों की मनमानी और दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने, क्षेत्र में सड़क और पुल निर्माण, गांवों के विद्युतीकरण, भूमि अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

सोमवार को सीतानदी-उदंती क्षेत्र से निकले ग्रामीणों को धमतरी पहुंचने से रोकने के लिए प्रशासन ने जगह-जगह बैरिकेडिंग और समझाइश की कोशिश की, लेकिन हर प्रयास नाकाम रहा। सबसे पहले बनरौद के पास बैरिकेड लगाकर ग्रामीणों को मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन कड़े विरोध के चलते अधिकारी उन्हें रोक नहीं सके। इसके बाद अछोटा के पास ट्रक और ट्रैक्टर सड़क के बीच खड़े कर रास्ता रोकने की कोशिश की गई, जिसे ग्रामीणों ने खुद हटवाकर आगे बढ़ना जारी रखा। दानीटोला में भी अधिकारियों ने चर्चा कर आंदोलन खत्म कराने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर गए। इधर कलेक्ट्रेट की सुरक्षा के लिए पूरे शहर में कड़ा सुरक्षा घेरा बनाया गया था। रायपुर ग्रामीण से अतिरिक्त पुलिस बल के साथ फायर ब्रिगेड की टीम भी तैनात की गई थी।

जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि सुशासन तिहार के दौरान सांकरा में वन परिक्षेत्र अधिकारी रिसगांव द्वारा गोंडी धर्म और आदिवासी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। जिससे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुईं और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ। समिति ने संबंधित अधिकारी के निलंबन और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सीतानदी उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र में पक्की सड़क, पुल-सेतु निर्माण, बिजली सुविधा उपलब्ध कराने, वन परिक्षेत्र अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई, अधिकारियों की मनमानी पर रोक, आदिवासी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर भूमि अधिकार प्रदान करने एवं सिविल अस्पताल बोरई में स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां करने की मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलन पर उतरे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा