बस्तर की रेल सेवा के बहाली की तय समय सीमा 22 से बढ़ाकर 28 अक्टूबर की गई

 


रेलवे काे 35 दिनों में माल परिवहन के बाधित हाेने से 411 करोड़ के नुकसान का अनुमान

जगदलपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। बस्तर की लाइफलाइन केके रेललाइन पर भूस्खलन से रेल यातायात को बुरी तरह प्रभावित हुआ। 24 सितंबर को मल्लीगुड़ा और छत्रिपुत के बीच हुए भूस्खलन के बाद पहले 22 अक्टूबर तक रेल परिचालन बहाल होने की उम्मीद थी। अब समय सीमा बढ़ाकर 28 अक्टूबर कर दी है।

ईस्ट कोस्ट रेलवे के जनसंपर्क विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से साेमवार काे जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार ईस्ट कोस्ट रेलवे और उसके अंतर्गत आने वाले रायगड़ा रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी टीम की समीक्षा के बाद रेलवे ने इसकी समय सीमा बढ़ाकर 28 अक्टूबर कर दी है। ऐसे में बस्तर की रेल सेवा सामान्य होने का इंतजार और लंबा हो गया है। केके रेललाइन बस्तर के औद्योगिक और माल परिवहन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग पर लोकल और विशाखापट्टनम रूट को मिलाकर प्रतिदिन लगभग 36 मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। भूस्खलन के कारण इस रेलमार्ग पर परिचालन प्रभावित होने से माल परिवहन पर भी असर पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार किरंदुल और बचेली साइडिंग से निकलने वाली 18 मालगाड़ियों का प्रति ट्रेन किराया करीब 60 लाख रुपये बताया गया है। वहीं, नगरनार से विशाखापट्टनम जाने वाली मालगाड़ी का किराया लगभग 50 लाख रुपये और आरापुर से जाने वाली मालगाड़ी का किराया करीब 45 लाख रुपये बताया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर 28 अक्टूबर तक के 35 दिनों में माल परिवहन के बाधित हाेने से लगभग 411 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। हालांकि यह राशि अनुमानित परिवहन मूल्य के आधार पर निकाली गई है. इसे रेलवे को होने वाला वास्तविक नुकसान या राजस्व की हानि नहीं माना जा सकता। वास्तविक आर्थिक प्रभाव परिचालन की स्थिति और प्रभावित मालगाड़ियों की संख्या पर निर्भर करेगा।

बस्तर के केके रेललाइन पर भूस्खलन की घटनाएं रेल परिचालन के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं। पहाड़ी और संवेदनशील हिस्सों में ऐसी घटनाओं के कारण ट्रेनों की आवाजाही बाधित होने से बस्तर के औद्योगिक परिवहन पर असर पड़ता है। इस रेलमार्ग के जरिए खनिज और अन्य माल को विभिन्न औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।

रेल परिचालन बहाल करने की समय सीमा बढ़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल पहाड़ी हिस्सों की सुरक्षा को लेकर है। बार-बार होने वाले भूस्खलन से बचाव के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपाय, पहाड़ी ढलानों की मजबूती और प्रभावी निगरानी जरूरी है। फिलहाल, रेल परिचालन बहाली की नई समय सीमा 28 अक्टूबर तय की गई है। अब देखना होगा कि रेलवे निर्धारित समय तक ट्रेनों की आवाजाही बहाल कर पाता है या नहीं. साथ ही बस्तर की लाइफलाइन मानी जाने वाली इस रेललाइन को भविष्य में भूस्खलन से सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे