सरगुजा में 'साइबर शिक्षक' बन पुलिस ने 2000 छात्रों को सिखाए डिजिटल सुरक्षा के गुर

 




















अम्बिकापुर, 05 सितंबर (हि.स.)। शिक्षक दिवस के अवसर पर सरगुजा जिले में एक अनोखी और प्रेरक पहल देखने को मिली, जहाँ कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस खुद शिक्षक की भूमिका में नजर आई। प्रदेशव्यापी ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत जिले में ‘मैं हूँ साइबर शिक्षक - साइबर शिक्षा से ही साइबर सुरक्षा’ थीम पर एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया।

डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के कुशल मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रितेश चौधरी के नेतृत्व में जिले के सभी थाना और चौकी क्षेत्रों की पुलिस टीमों ने न केवल स्कूलों में दस्तक दी, बल्कि शिक्षकों के घर पहुंचकर भी उन्हें इस मुहिम का हिस्सा बनाया।

कक्षाओं में पहुंचकर पुलिस अधिकारियों ने स्वयं ब्लैकबोर्ड पर चॉक चलाकर छात्र-छात्राओं को सरल और व्यावहारिक भाषा में डिजिटल दुनिया की बारीकियां समझाईं। इस विशेष अभियान के जरिए 2000 से अधिक स्कूली विद्यार्थियों को सीधे तौर पर प्रशिक्षित किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों से अपील की कि वे स्कूल में सीखी गई बातों को अपने घर तक ले जाएं और अपने माता-पिता व बुजुर्गों के लिए भी ‘साइबर शिक्षक’ की भूमिका निभाएं। इस मौके पर एसएसपी राजेश अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल युग में भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि अज्ञानता ही साइबर अपराधों की मुख्य जड़ है; यदि बच्चे स्कूल स्तर से ही सतर्क रहेंगे तो पूरा समाज ठगी से सुरक्षित रहेगा।

अभियान के दौरान पुलिस ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया और फर्जीवाड़े के विभिन्न तौर-तरीकों से आगाह किया। बच्चों को समझाया गया कि फ्री फायर या बीजीएमआई जैसे खेलों में मुफ्त कॉइन्स, हथियार या स्किन्स के लालच में आकर माता-पिता के बैंक खाते की जानकारी साझा न करें और न ही अनजान गेमर्स को अपनी निजी जानकारी दें। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्रोफाइल को हमेशा ‘प्राइवेट’ रखने, अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने और किसी भी संदिग्ध वीडियो कॉल से बचने की सख्त हिदायत दी गई, ताकि प्रोफाइल क्लोनिंग और ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं पर रोक लग सके।

पुलिस ने विद्यार्थियों को फिशिंग लिंक्स और साइबर ग्रूमिंग के खतरों के प्रति भी सचेत किया। वॉट्सऐप या एसएमएस पर लॉटरी, स्कॉलरशिप और उपहार के नाम पर आने वाले किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी गई। बच्चों से कहा गया कि यदि इंटरनेट पर कोई उन्हें परेशान, ब्लैकमेल या बुली करने की कोशिश करे, तो डरने या बात छुपाने के बजाय तत्काल अपने परिजनों और शिक्षकों को सूचित करें। साथ ही, किसी भी सूरत में बैंक खाते या फोन पर आए ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा न करने का संकल्प दिलाया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है; नागरिक तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह