जांजगीर-चांपा और सक्ती के शहरों में अब पाइपलाइन से पहुंचाने की तैयारियां शुरू

 

जांजगीर-चांपा, 26 अक्टूबर (हि. स.)। जिले के शहरी क्षेत्रों में आने वाले दिनों में रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था बदलने वाली है। घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडरों की जगह पाइपलाइन के जरिए सीधे रसोई तक प्राकृतिक गैस पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है।चूंकि परियोजना अभी सर्वे, रूट प्लानिंग और शुरुआती प्रशासनिक अप्रूवल के दौर से गुजर रही है, इसलिए हर घर तक सीधे गैस सप्लाई चालू होने में कम से कम 1 से 2 साल का समय लग सकता है।

राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति-2026 लागू होने के बाद इस दिशा में नगरीय निकायों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। योजना के अमल में आने से लोगों को बार-बार गैस सिलेंडर बुक कराने और डिलीवरी का इंतजार करने की परेशानी से राहत मिल सकेगी। हालांकि पाइपलाइन बिछाने और घरों तक गैस आपूर्ति शुरू होने में अभी समय लगेगा।

जानकारी के अनुसार मई 2026 में नीति का राजपत्र प्रकाशित होने के बाद संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को गैस वितरण नेटवर्क विकसित करने के संबंध में निर्देश दिए हैं। इसके तहत जांजगीर, नैला, चांपा, अकलतरा, बलौदा, नवागढ़ और शिवरीनारायण सहित जिले के अन्य नगरीय क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क विकसित करने की योजना है। वहीं पड़ोसी सक्ती जिले के सक्ती, डभरा, चंद्रपुर, नया बाराद्वार और अड़भार जैसे शहरी क्षेत्रों को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत केवल घरों तक ही गैस पहुंचाने की तैयारी नहीं है, बल्कि वाहनों के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) स्टेशनों का नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा। इसके लिए नगरीय निकायों को शहरों के मास्टर प्लान में सीएनजी स्टेशनों के लिए भूमि आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में शहरों के विस्तार के साथ गैस आपूर्ति की व्यवस्था भी विकसित की जा सकेगी।

शहरी क्षेत्रों में गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों की खुदाई और उनकी मरम्मत को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। पाइपलाइन बिछाने का काम केवल केंद्र सरकार और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड से अधिकृत कंपनियां ही कर सकेंगी। संबंधित कंपनी को सड़क की खुदाई से पहले सुरक्षा राशि के रूप में बैंक गारंटी जमा करनी होगी। पाइपलाइन डालने के बाद सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल करने की जिम्मेदारी भी कंपनी की होगी। इससे पाइपलाइन निर्माण के बाद सड़कों के क्षतिग्रस्त रहने जैसी समस्याओं पर नियंत्रण की उम्मीद है।

नई नीति का असर आने वाले समय में शहरों में बनने वाले मकानों और व्यावसायिक भवनों पर भी दिखाई देगा। शहरी विकास नियमों में संशोधन के तहत नए आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण के दौरान ही गैस पाइपलाइन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना होगा। इससे भविष्य में गैस कनेक्शन देने के लिए बार-बार निर्माण कार्य या तोड़फोड़ की जरूरत कम होगी।

फिलहाल जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले के अधिकांश घरों में खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जाता है। सिलेंडर खत्म होने पर उपभोक्ताओं को दोबारा बुकिंग करानी पड़ती है और आपूर्ति का इंतजार करना पड़ता है। पाइपलाइन से गैस आपूर्ति शुरू होने के बाद उपभोक्ताओं को जरूरत के अनुसार लगातार गैस मिल सकेगी। इसका बिल भी इस्तेमाल की गई गैस के आधार पर आएगा। हालांकि एलपीजी के मुकाबले पीएनजी कितनी सस्ती पड़ेगी, यह स्थानीय गैस दरों और उपभोक्ताओं की खपत पर निर्भर करेगा।

अधिकारियों ने दोनों जिलों के स्थानीय प्रशासन (जैसे जांजगीर, नैला, चांपा, अकलतरा और सक्ती, डभरा निकायों) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने शहरों के मास्टर प्लान में सीएनजी स्टेशनों और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अभी से भूमि आरक्षित करना शुरू कर दें।टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगरीय निकाय के अधिकारियों के अनुसार, अब नए आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण की अनुमति तभी मिलेगी जब वे नक्शे में ही गैस पाइपलाइन का ढांचा (स्ट्रक्चर) शामिल करेंगे।

गैस कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार महाराष्ट्र से होकर छत्तीसगढ़ (रायपुर, बिलासपुर) होते हुए ओडिशा के झारसुगड़ा तक जाने वाली मुख्य गैस ट्रंक लाइन का काम प्रगति पर है। इसी मुख्य लाइन के नेटवर्क से चांपा-जांजगीर और सक्ती को जोड़ा जा रहा है, जहां से आगे कोरबा के लिए भी पाइपलाइन जाएगी।अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एक बार मोहल्लों में खुदाई और पाइप बिछाने की अनुमति मिलने के बाद कंपनियों को 4 महीने के भीतर काम पूरा करना होगा, ऐसा न करने पर भारी पेनल्टी का प्रावधान है।

हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT