धमतरी : कांगेस नेताओं ने मनरेगा बचाओ संग्राम यात्रा निकाली
धमतरी, 20 जनवरी (हि.स.)। धमतरी जिले के मगरलोड ब्लाक में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर 20 जनवरी को विकासखंड मगरलोड के ग्राम मेघा, अरौद, गिरौद, सौंगा, हरदी में मनरेगा बचाओ संग्राम यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में शामिल छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा को कमजोर करने और धीरे‑धीरे बंद करने की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर पड़ रहा है। मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि गरीबों की आर्थिक सुरक्षा की रीढ़ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट कटौती और भुगतान में देरी के जरिए इस योजना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने मजदूरों से आह्वान किया कि वे अपने हक के लिए संगठित रहें और आवाज उठाएं। दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ में सामने आए धान की कमी के मामलों पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कवर्धा और महासमुंद के बाद अब बेमेतरा जिले में भी करीब 17 करोड़ रुपये के धान की कमी सामने आई है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों में बैठे वीआईपी किस्म के 14 चूहों ने धान खा लिया, लेकिन अपनी नौकरी बचाने के लिए अधिकारी अब दूसरों को बदनाम कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जिसे वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था, एक अधिकार-आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है. कानून के तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल और परिभाषित विशेषता है। सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम ने कहा की मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है। यह प्रतिवर्ष पांच-छह करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है, मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करता है, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाता है और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करता है। इसकी मांग-आधारित संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्य दिवसों का लगभग 60 प्रतिशत है। पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव ने कहा की नया वीबी जीरामजी अधिनियम यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है, ग्राम सभाओं और पंचायतों को कमजोर करता है तथा केंद्र के मजदूरी अंशदान को लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर देता है, जिससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर डाल दिया जाता है। इस अवसर पर इस अवसर लेख राम साहू, नीलम चंद्राकर, मोहन लालवानी, सरद लोहाणा, विनोद तिवारी, विपिन साहू, राजकुमारी दिवान, विनीत बाफना, डीहु राम साहू, सुरेश साहू, राजेश साहू, सुनील महेश्वरी, पंकज माहवार, प्रभात राव मेघा वाले, शारदा साहू, महिम शुक्ला, देवव्रत साहू, चंद्रहास साहू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस जन शामिल हुए।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा