कांग्रेस विधायक ने मुरिया दरबार के निमंत्रण में आदिवासी जनप्रतिनिधियों के नाम नहीं हाेने का लगाया आराेप
जगदलपुर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन से पहले निमंत्रण पत्र को लेकर सवाल उठे हैं। विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने बुधवार काे कहा कि निमंत्रण पत्र में संभाग के आदिवासी जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के नाम शामिल नहीं होने से उनकी भागीदारी को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बस्तर की आदिवासी परंपरा से जुड़े इतने बड़े आयोजन में स्थानीय प्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों को उचित स्थान मिलना चाहिए।
विधायक लखेश्वर बघेल ने जिन जनप्रतिनिधियों के नामों का उल्लेख किया, उनमें कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, कोंटा विधायक कवासी लखमा, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, कांकेर विधायक आसाराम नेताम, भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी और अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी शामिल हैं। उन्होंने आदिवासी समाजों के प्रमुखों की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाए। निमंत्रण प्रक्रिया और अतिथि सूची को लेकर संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन तथा बस्तर दशहरा समिति का पक्ष सामने आना बाकी है।
निमंत्रण पत्र के मुद्दे के साथ विधायक लखेश्वर बघेल ने इंद्रावती नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों की समस्याएं भी राष्ट्रपति के सामने रखने का आग्रह किया है। बाढ़ से कई गांवों में मकानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा। प्रभावित परिवारों के सामने घरों की मरम्मत, खेती दोबारा शुरू करने और आजीविका संभालने की चुनौती है। उन्होंने मांग की कि मुरिया दरबार में शामिल होने वाले जनप्रतिनिधि बाढ़ प्रभावित किसानों, मजदूरों और परिवारों की समस्याएं राष्ट्रपति तक पहुंचाएं। राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाने, मकान क्षति का उचित आकलन और फसल नुकसान के मुआवजे में पर्याप्त राहत देने की मांग भी उठाई जाए। बघेल का कहना है कि राहत राशि और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से पहल होनी चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को नुकसान से उबरने में मदद मिल सके।
विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान जुड़ी है। ऐसे आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों की भागीदारी को लेकर उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। साथ ही, राष्ट्रपति के दौरे के दौरान बाढ़ प्रभावित परिवारों की राहत, पुनर्वास और मुआवजे की मांग को संबंधित स्तर तक पहुंचाना भी अहम रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे