हुक्का-पानी बंद करने और सामाजिक बहिष्कार का आरोप, कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे पीड़ित परिवार

 


धमतरी, 25 अगस्त (हि.स.)। ग्राम तर्रागोंदी के एक परिवार ने गांव में उनका हुक्का-पानी बंद करने, सामाजिक बहिष्कार करने और आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई।

पीड़ित धनेश्वर पिता प्रभूराम, उम्र 60 वर्ष, ने शिकायत में बताया कि, पुश्तैनी जमीन पर पारिवारिक जरूरत के लिए मकान निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन जमीन के संबंध में विवाद के चलते निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों में पुश्तैनी जमीन के रकबे और खसरा नंबरों में त्रुटियां हैं, जिनके सुधार के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन संबंधी विवाद को लेकर करीब दो वर्ष से गांव में बैठकें कर उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग किया जा रहा है। खेती-बाड़ी में मजदूरी, ट्रैक्टर एवं कृषि कार्य के लिए वाहन किराए पर देने से लोगों को रोका गया है। परिवार के सदस्यों से बातचीत और उनके घर आने-जाने पर भी कथित रूप से प्रतिबंध लगाया गया है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 24 जून 2024 से परिवार का हुक्का-पानी बंद है तथा 12 सितंबर 2024 को साहू समाज की बैठक के दौरान उन्हें सामाजिक गतिविधियों और समाज में आने-जाने से बहिष्कृत कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि गांव में ऐसा नियम बनाया गया है कि जो भी व्यक्ति उनके परिवार से बातचीत, सहयोग या लेनदेन करेगा, उस पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यहां तक कि उनके करीब 25 गाय-बछड़ों को चराने के लिए चरवाहे को भी कथित रूप से रोक दिया गया है, जिसके कारण परिवार को काफी परेशानी हो रही है और उन्हें दूसरे गांव से राशन लाना पड़ रहा है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि, परिवार में करीब 30 सदस्य हैं और पिछले वर्ष परिवार में तीन विवाह होने के बाद रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची। इसी कारण अपने निजी भूखंड पर मकान निर्माण कराया जा रहा था। उनका कहना है कि जमीन पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है और वे अपने पुश्तैनी अधिकार वाली भूमि पर निर्माण कर रहे हैं। शिकायत में पूर्वजों द्वारा वर्ष 1951 में खरीदी गई भूमि सहित राजस्व अभिलेखों में दर्ज विभिन्न खसरा नंबरों और रकबे में त्रुटियों का उल्लेख करते हुए अभिलेख सुधार की मांग भी की गई है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर सामाजिक बहिष्कार और कथित हुक्का-पानी बंद कराने में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, कानूनी कार्रवाई करने तथा परिवार को सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से जीवनयापन का अधिकार दिलाने की मांग की है। शिकायत में गजेन्द्र कुमार पिता छबिल राम साहू, लीला राम साहू पिता भगेला राम साहू, तामेश्वर निषाद पिता परस निषाद, संतराम निषाद पिता सुखराम, द्वारिका पिता रामप्रसाद, चोवाराम साहू सरपंच, परसराम साहू पिता हेमुराम साहू, सुदर्शन पिता लेदूराम, मानसिंग पिता मंशाराम, चम्मन लाल पिता विष्णुराम और हरिश सेन पिता पुनित सेन सहित अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए हैं।

परिवार ने प्रशासन से गांव में समझाइश देकर सामाजिक रूप से उन्हें पुनः मुख्यधारा में शामिल कराने तथा ऐसा नहीं होने की स्थिति में दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही पुश्तैनी भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच कर त्रुटियों में सुधार कराने का भी आग्रह किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा