प्रश्नपत्र नहीं छपने से ब्लैक बोर्ड देखकर परीक्षा दे रहे पहली से आठवीं तक के बच्चे

 


छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने उठाए सवाल, कहा- प्रश्नपत्र छपवाने के लिए भी फंड नहीं

धमतरी, 22 सितंबर (हि.स.)। धमतरी जिले में सोमवार से त्रैमासिक परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। परीक्षा को लेकर कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था सामने आई है। कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के प्रश्नपत्र जिला स्तर पर तैयार कर स्कूलों को पीडीएफ के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के प्रश्नपत्रों की छपाई नहीं कराई गई है।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि, पहली से आठवीं तक के लाखों बच्चों को प्रश्नपत्र देने के बजाय ब्लैक बोर्ड पर लिखे प्रश्न देखकर परीक्षा दे रहे हैं। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डा भूषण लाल चंद्राकर ने बताया कि, जिले में त्रैमासिक परीक्षा केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत आयोजित की जा रही है। कक्षा पहली से आठवीं तक के लिए जिला स्तर पर एक समान प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं, लेकिन इन्हें स्कूल स्तर पर प्रिंट कराने की व्यवस्था नहीं की गई। तैयार प्रश्नपत्रों की पीडीएफ स्कूलों को वाट्सएप के माध्यम से भेजी गई है। इसके बाद शिक्षक ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिख रहे हैं।

विद्यार्थी उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका में उतारने के बाद उत्तर लिख रहे हैं। पहले दिन आठों कक्षाओं में हिंदी की परीक्षा: परीक्षा समय-सारणी के अनुसार 21 सितंबर को कक्षा पहली से आठवीं तक हिंदी की परीक्षा हुई। जिले के कई स्कूलों में एक या दो शिक्षक ही पदस्थ हैं। ऐसे स्कूलों में शिक्षकों को निगरानी के साथ-साथ ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। इसके बाद विद्यार्थियों को प्रश्न अपनी कापी में उतार रहे हैं। और फिर उनके उत्तर लिख रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सामान्य परीक्षा में विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र मिलते ही वे प्रश्न पढ़कर उत्तर लिखना शुरू कर देते हैं, लेकिन यहां पहले शिक्षक प्रश्न बोर्ड पर लिखेंगे, फिर विद्यार्थी उसे कापी में उतारेंगे और उसके बाद उत्तर लिखेंगे। यदि प्रश्नपत्र में चित्र, आकृतियां या तालिकाएं शामिल हैं तो बच्चों को उन्हें भी बोर्ड देखकर अपनी कापी में बनाना पड़ेगा। इसी तरह हिंदी और अंग्रेजी के लंबे गद्यांश वाले प्रश्न आने पर शिक्षक को पहले पूरा गद्यांश ब्लैक बोर्ड पर लिखना होगा और बच्चों को उसे उतारना पड़ेगा। इससे परीक्षा का महत्वपूर्ण समय उत्तर लिखने के बजाय प्रश्नों को कापी में लिखने में खर्च हो रहा है।

डा. भूषण लाल चंद्राकर ने कहा कि परीक्षा का उद्देश्य बच्चों के ज्ञान और समझ का मूल्यांकन करना है। ब्लैक बोर्ड से प्रश्न उतारने में समय लगने के कारण विद्यार्थियों को उत्तर लिखने के लिए कम समय मिल रहा है। यह बच्चों के लिए न्यायसंगत नहीं है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था पर कड़ा एतराज जताते हुए सवाल उठाया है कि जब कक्षा नौवीं से 12वीं तक के प्रश्नपत्रों की व्यवस्था की जा सकती है तो पहली से आठवीं तक के बच्चों के प्रश्नपत्र छपवाने के लिए जिला स्तर पर फंड की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। एसोसिएशन ने विद्यार्थियों को सीधे प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की मांग की है। विरोध दर्ज कराने वालों में जिला अध्यक्ष डा. भूषण लाल चंद्राकर, प्रांतीय उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेंद्र पारीक, प्रदेश महिला प्रतिनिधि सविता छाटा, जिला महिला प्रतिनिधि बी. यदु, जिला सचिव बलराम तारम, जिला कोषाध्यक्ष कैलाश प्रसाद साहू, जिला उपाध्यक्ष नंदकुमार साहू, गणेश प्रसाद साहू, जिला महासचिव डा आशीष नायक, ब्लाक अध्यक्ष गेवाराम नेताम, शैलेंद्र कौशल, दिनेश कुमार साहू, रमेश कुमार यादव, रामप्रसाद नाग, परविंदर कौर गिल, पार्वती निषाद सहित अन्य पदाधिकारी व सदस्य शामिल हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा