देश के पहले बालविवाह मुक्त जिला बालोद में हो रहा था बालविवाह

 




धमतरी, 14 जनवरी (हि.स.)। देश का पहला बालविवाह मुक्त जिला बालोद के एक गांव में बाल विवाह शुरू हो गया था। 14 जनवरी को 20 साल का दूल्हा बारात निकलने वाला था कि धमतरी जिला बाल संरक्षण विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने बाल विवाह रूकवाया। दूल्हा के स्वजनों को बाल विवाह की कार्रवाई व जानकारी देने पर कार्रवाई रूकी, नहीं तो बाल विवाह हो जाता, क्योंकि बालोद जिले के जवाबदार अधिकारी-कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं थी।

देश का पहला बालविवाह मुक्त जिला बालोद है। राज्य सरकार ने जिले के 436 ग्राम पंचायतों और नौ नगरीय निकायों को औपचारिक प्रमाण पत्र भी प्रदान कर दिया है। इसके बाद से जिले के अधिकारी-कर्मचारी जिले के कौन से गांव में बालविवाह हो रहा है इसका निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। धमतरी जिले के सजकता से बालोद जिले में हो रही बालविवाह रूक गया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी आनंद पाठक से मिली जानकारी के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने जिले के कुरुद ब्लाक में बाल विवाह रुकवाया। टीम ने जांच के दौरान पाया कि लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम थी। धमतरी जिले के कुरूद ब्लाॅक के एक गांव में बालिग युवती की शादी 13 जनवरी को बालोद जिले के 19 साल छह माह के लड़का से होने वाली थी। 12 जनवरी की रात महिला एवं बाल विकास विभाग धमतरी को नाबालिग के शादी की सूचना मिली। टीम ने दूसरे दिन सुबह लड़के पक्ष के स्वजन से संवाद कर आधार कार्ड, अंकसूची व अन्य दस्तावेज मंगवाया। जिसमें लड़के की उम्र 19 साल 6 माह था। वहीं लड़की बालिग थी। लड़का नाबालिग होने के कारण बाल विवाह नहीं करने की सलाह दी गई है। परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी दी गई। इसके बाद स्वजनों ने बालिग होने के बाद विवाह करने का निर्णय लिया। महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने लड़की पक्ष के गांव जाकर भी बाल विवाह की सूचना दी। जिसके बाद आगामी डेढ़ साल में 21 साल पूरा होने के बाद विवाह करने का निर्णय लिया गया। इस कार्रवाई के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी यशवंत बैस, विधिक सह परिविक्षा अधिकारी प्रमोद अमृत, चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर गिरधारी लाल साहू, तुलेश्वर साहू आदि मौजूद थे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा