अंबिकापुर : सरगुजा की 'छेरी बैंक' योजना से ग्रामीण महिलाओं की आजीविका में आया क्रांतिकारी बदलाव
अंबिकापुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। सरगुजा जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ’बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिल रही है, जहाँ विकासखंड लखनपुर के ग्राम पंचायत कुंवरपुर की महिलाएं पशुपालन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं। यहाँ ’प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह’ द्वारा संचालित ’सरगुजा छेरी बैंक’ ने एक ऐसा नवाचार पेश किया है, जिसने पारंपरिक बैंकिंग की परिभाषा बदलते हुए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना शुरू कर दिया है।
इस अनोखे बैंक के माध्यम से उन ग्रामीण महिलाओं को आजीविका का सहारा मिल रहा है, जो संसाधनों के अभाव में अपना काम शुरू करने में असमर्थ थीं। आत्मनिर्भरता के इस सफर की शुरुआत चार बकरियों के लोन के साथ होती है। प्रगति समूह की सदस्य अनीता बताती हैं कि समूह से जुड़ी सक्रिय महिलाओं को मात्र 3000 रुपये के सेवा शुल्क पर 4 बकरियां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिसके बदले समूह अगले चार वर्षों तक उन पशुओं के टीकाकरण और उपचार की पूरी जिम्मेदारी उठाता है।
इस योजना की सबसे खास और अनूठी बात इसकी किस्तों की अदायगी है, जहाँ महिलाओं को नकद राशि के बजाय बकरियों के बच्चे (मेमने) वापस करने होते हैं। लाभार्थी महिला चार साल की अवधि में कुल 16 बच्चे ’छेरी बैंक’ को लौटाती है, जिससे यह चक्र निरंतर चलता रहता है और बैंक के पास अन्य जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए पर्याप्त संसाधन बने रहते हैं।
समूह के पदाधिकारियों का कहना है कि यह लोन केवल उन्हीं महिलाओं को दिया जाता है जो समूह में नियमित बचत और पारदर्शी लेन-देन करती हैं, जिससे महिलाओं के बीच अनुशासन और बैंकिंग साक्षरता में भी वृद्धि हो रही है। इस अभिनव पहल ने न केवल कुंवरपुर की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र किया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है।
आज हजारों महिलाएं इस सकारात्मक बदलाव के लिए जिला प्रशासन सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली 'बिहान' योजना के प्रति आभार व्यक्त कर रही हैं, जो उनके जीवन में समृद्धि का नया सवेरा लेकर आई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह