छत्तीसगढ़ में यूसीसी की तैयारी तेज, समान नागरिक संहिता पर जनता से मांगे गए सुझाव
- 15 अक्टूबर तक भेज सकेंगे राय और अभिमत
रायपुर, 4 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों से यूसीसी के संबंध में सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। इच्छुक नागरिक 15 अक्टूबर 2026 तक अपने सुझाव समिति को भेज सकते हैं।
राज्य सरकार की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति छत्तीसगढ़ में यूसीसी की आवश्यकता, उसकी रूपरेखा तथा क्रियान्वयन की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही समिति विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और अन्य व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े वर्तमान कानूनों एवं व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा भी करेगी। प्राप्त सुझावों के आधार पर समिति अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपेगी।
समिति ने सभी शासकीय एवं गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, विभिन्न समुदायों तथा राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने विचार एवं अभ्यावेदन अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें, ताकि व्यापक जनभागीदारी के साथ कानून का मसौदा तैयार किया जा सके।
देश का पांचवां राज्य बनने की तैयारी-
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। इसके बाद गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी यूसीसी लागू किए जाने का उल्लेख किया गया है। अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ते हुए यूसीसी लागू करने की तैयारी कर रहा है।
राज्य सरकार ने यूसीसी के अध्ययन एवं सुझावों के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर