भव्य मंगल प्रवेश यात्रा के साथ धमतरी में चातुर्मास का शुभारंभ, जिनवाणी से गूंजी धर्मनगरी
धमतर, 23 जुलाई (हि.स.)।
धर्मनगरी धमतरी में गुरूवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब आदिश्वर जिनालय से पार्श्वनाथ जिनालय तक साध्वी भगवंतों की भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश यात्रा निकाली गई। कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा जी महाराज की सुशिष्या, प्रवचन प्रवीणा स्नेहयशा जी महाराज की अंतेवासिनी रत्ननिधि जी महाराज सहित ठाणा-4 का नगर में मंगल प्रवेश हुआ।
28 जुलाई से प्रारंभ हो रहे चातुर्मास के अवसर पर जगह-जगह समाजजनों और नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर साध्वी भगवंतों का भावभीना स्वागत किया। महिलाओं ने मंगल कलश के साथ शोभायात्रा की अगुवाई की, जबकि श्रद्धालु जैन धर्म के ध्वज हाथों में लेकर जिनशासन की जय-जयकार करते हुए पूरे मार्ग में धर्ममय वातावरण का निर्माण करते रहे। पार्श्वनाथ जिनालय पहुंचने पर साध्वी भगवंतों ने परमात्मा एवं दादा गुरुदेव के दर्शन-वंदन किए, जिसके बाद धर्मसभा में चातुर्मासिक प्रवेश कार्यक्रम आयोजित हुआ। महिला मंडलों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर आध्यात्मिक वातावरण को और भी भावपूर्ण बना दिया। अपने प्रेरक प्रवचन में रत्ननिधि जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल नगर प्रवेश का अवसर नहीं, बल्कि आत्मा में प्रवेश और आत्मजागृति का महापर्व है। उन्होंने कहा कि इस चार माह की अवधि में धर्म, साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का पुरुषार्थ करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आषाढ़ी चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी से प्रारंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है और इस दौरान साधु-साध्वी एक ही स्थान पर रहकर साधना एवं जिनवाणी के माध्यम से समाज को आत्मकल्याण का मार्ग बताते हैं। अपने दीक्षा जीवन का प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में धमतरी से छहरीपाली तक निकली पदयात्रा के दौरान स्नेहयशा जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ था। उसी समय उनके स्नेह, आशीर्वाद और प्रेरणा ने संयम जीवन अपनाने का संकल्प दृढ़ किया। उन्होंने कहा कि इस प्रेरणा में धमतरी संघ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसके लिए वे सदैव कृतज्ञ रहेंगी। उन्होंने कहा कि चातुर्मास पानी और वाणी का काल है। जिस प्रकार वर्षा का जल धरती की तपन शांत कर उसे समृद्ध बनाता है, उसी प्रकार जिनवाणी आत्मा पर चढ़े कर्मों की तपन को शांत कर उसे निर्मल बनाती है। पानी शरीर की शुद्धि करता है, जबकि जिनवाणी आत्मा की शुद्धि का माध्यम है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि 120 दिनों के इस पावन चातुर्मास का अधिकतम लाभ उठाते हुए देव, गुरु और धर्म की शरण स्वीकार करें तथा आत्मा को जानने और जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाने का संकल्प लें। मंगल प्रवेश समारोह में साध्वी भगवंतों के सांसारिक माता-पिता एवं परिजन भी उपस्थित रहे, जिनका चातुर्मास व्यवस्था समिति और श्रीसंघ की ओर से सम्मान किया गया।कार्यक्रम में विजय गोलछा, जीवन लोढ़ा, धरमचंद पारख, विरेंद्र गोलछा, अजय बरड़िया, पारसमल गोलछा, लूणकरण गोलछा, लक्ष्मीलाल लूनिया सहित अनेक शहरों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचकर इस ऐतिहासिक मंगल प्रवेश यात्रा और धर्मसभा के साक्षी बने।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा