छग विधानसभा : मछुआ नीति 2022 को लेकर मंत्री नेताम ने सदन में की नई नीति में विसंगतियों को दूर करने की घोषणा
रायपुर, 16 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने मछुआ नीति की विसंगतियों पर सवाल उठाया। नेता प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री रामविचार नेताम ने नई नीति पर काम जारी होने की जानकारी देते हुए सदन में तमाम विसंगतियों को दूर करने की घोषणा की।
मछुआ नीति 2022 की विसंगतियों और पट्टा आवंटन में गड़बड़ी को लेकर आज विधानसभा में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सवाल उठाया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन क्षेत्रों के तालाबों पर आदिवासियों का प्राकृतिक अधिकार है। वर्तमान नीति में उनसे टैक्स लेने का प्रावधान है, जो कि गलत है। उन्होंने नीति में संशोधन की मांग की। जांजगीर-चांपा सहित कई क्षेत्रों में गैर-मछुआ परिवारों और अपात्र लोगों को मछली पालन का पट्टा आबंटित करने के आरोप लगे। भाजपा विधायक ने अजय चंद्राकर ने कहा कि मौजूदा नीति 2022 में भूपेश सरकार ने बनाया था। 10 हजार हेक्टेयर का ठेका पंजीकृत व्यक्ति या संस्था को देने का प्रावधान किया गया। इससे स्थानीय लोग, समुदाय का हक मारा गया। नई नीति में इन सब विसंगतियों को दूर किया जाए। कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने मछुआरों के हित में तालाबों में 6 महीने के बजाय 12 महीने पानी सुनिश्चित करने की मांग रखी।
नेता प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री रामविचार नेताम ने नई नीति पर काम जारी होने की जानकारी देते हुए सदन में तमाम विसंगतियों को दूर करने की घोषणा की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग नई मछुआ नीति पर काम कर रहा है और मौजूदा नीति की सभी विसंगतियों को पूरी तरह दूर किया जाएगा।
नेताम आश्वासन दिया कि स्थानीय मछुआरा समुदायों और आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखकर पॉलिसी में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। जिन भी क्षेत्रों में पट्टा आवंटन को लेकर अनियमितताएं या नाइंसाफी हुई है, उनकी जांच करवाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित समितियों को न्याय दिया जाएगा।इस बहस के दौरान विभागीय उत्तरों से पूर्णतः संतुष्ट न होने के कारण कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट भी किया।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा