रायपुर सहित कई जिलों में लहराए गए कथित आपत्तिजनक पोस्टरों की जांच शुरू

 


रायपुर, 31 जुलाई (हि.स.)। नीट प्रदर्शन के दौरान रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों में लहराए गए कथित आपत्तिजनक पोस्टरों और सोशल मीडिया पर वायरल फोटो-वीडियो को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों और संदिग्ध आयोजनों के बाद, पुलिस अब जमीन से लेकर इंटरनेट तक असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों की तलाश कर रही है।

राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नर ने अगले 2 महीनों तक बिना अनुमति के रैली, जुलूस और धरना-प्रदर्शनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।यह आदेश रायपुर पुलिस और प्रदेश की साइबर सेल विंग के आला अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया है। रायपुर में हाल ही में लागू हुए कमिश्नर सिस्टम के तहत पुलिस के पास कानून-व्यवस्था और उपद्रवियों पर त्वरित कार्रवाई करने के सीधे अधिकार हैं।यह कार्रवाई जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में तब और तेज कर दी गई, जब रायपुर में नीट प्रदर्शन के दौरान हुए हिंसक टकराव और सोशल मीडिया पर ₹4,999 वाली कथित 'सीक्रेट प्राइवेट पूल पार्टी' का पोस्टर तेजी से वायरल हुआ।

प्रदेश के सभी 33 जिलों की पुलिस और साइबर सेल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कड़ी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस केवल पोस्टर लहराने वालों की ही नहीं, बल्कि आपत्तिजनक सामग्री को सोशल मीडिया पर अपलोड, साझा और प्रसारित करने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाएगी।

रायपुर के कलेक्टोरेट चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के पास आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन में कुछ नाबालिग भी मौजूद थे। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ प्रतिभागियों के हाथों में अशोभनीय और आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्टर दिए गए थे। साथ ही प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इन सभी बिंदुओं की पुलिस जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन्हें पोस्ट करने, साझा करने और प्रसारित करने वाले खातों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी जानकारों के अनुसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बावजूद सार्वजनिक स्थान पर अश्लील या आपत्तिजनक पोस्टर प्रदर्शित करना दंडनीय हो सकता है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। यदि किसी पोस्टर में महिला का अशोभनीय चित्रण पाया जाता है, तो स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। इसके अलावा यदि किसी सामग्री से सार्वजनिक शांति भंग होने या लोगों में तनाव फैलने की आशंका हो, तो बीएनएस की धारा 296 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा