छग: बालोद जिले के ग्रामीणों की अनोखी पहल, पढ़ाई में सुधार के लिए बच्चों को शाम को बाहर घूमने पर लगाई पाबंदी
बालोद /रायपुर, 24 अक्टूबर (हि.स.)। बच्चों के लगातार खराब परीक्षा परिणाम और नशे के आदी लोगों की संगत से दूर रखने के लिए पालकों और ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडी विकासखंड के 11 गांवों में स्कूली बच्चों के शाम को घूमने पर पाबंदी लगा दी है।
संकुल केंद्र सुरडोंगर के अंतर्गत आने वाले 11 गांवों के ग्रामीणों और पालकों ने मिलकर फैसला लिया है कि बच्चे शाम 6 बजे के बाद बिना किसी जरूरी काम के बाहर नहीं घूमेंगे और इस समय का उपयोग पूरी तरह से अपनी पढ़ाई के लिए करेंगे।
इन 11 गावों में सुरडोंगर, कुंजकन्हार, मरकाटोला, कुर्सीटिकुर,मरदेल ,मगरदाह ,तुमडीसुर, जबकसा, लिमऊडीह,नयापारा तथा खल्लारीपारा शामिल हैं
सुरडोंगर हायर सेकंडरी स्कूल की पालक समिति के अध्यक्ष भुवेंद्र साहू ने बताया कि पिछले साल बालोद जिला परीक्षा परिणाम के टॉप-10 में जगह नहीं बना पाया था। संकुल केंद्र सुरडोंगर के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के शिक्षकों ने बच्चों के गिरते शैक्षणिक स्तर को देखते हुए सबसे पहले यह विचार पालकों के सामने रखा था। शिक्षकों के इस सुझाव पर सभी 11 गांवों के ग्रामीणों, पालकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने एक बड़ी बैठक बुलाई। बालोद जिले के डौंडी विकासखंड के संकुल केंद्र सुरडोंगर के तहत इन 11 गांवों के ग्रामीणों, पालकों और जनप्रतिनिधियों ने यह महत्वपूर्ण और संयुक्त महाबैठक हाल ही में अक्टूबर में शैक्षणिक सत्र के बीच में तिमाही परीक्षाओं के आसपास बुलाई थी।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि बच्चों के भविष्य को सुधारने की जिम्मेदारी सिर्फ स्कूल की नहीं बल्कि पूरे समाज की है।इस नियम का पालन कराने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही निगरानी समितियां बनाई हैं, जो शाम 6 बजे के बाद गलियों और चौक-चौराहों पर नजर रखती हैं। उनका मानना है कि बच्चों को घर पर पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय देने और उनकी दिनचर्या पर नजर रखने से उनमें अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ेगा। साथ ही वे नशे और असामाजिक गतिविधियों से दूर रह सकेंगे। स्कूल से लौटने के बाद बच्चे केवल शाम 6 बजे तक ही बाहर खेल-कूद या अन्य कामों के लिए रह सकते हैं। इसके बाद उनका चौपालों, गलियों, दुकानों या चौकों पर घूमना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पालकों के मुताबिक, बच्चों के तिमाही परीक्षा परिणाम में सुधार आया है और उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि भी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि इस नियम से बच्चों की दिनचर्या में अनुशासन आएगा। शाम को घर पर रहकर बच्चे नियमित रूप से अपना होमवर्क पूरा कर सकेंगे, जिसकी निगरानी खुद उनके पालक करेंगे।
इस पहल से बच्चों की दिनचर्या में बदलाव आया है। बच्चों का कहना है कि पहले स्कूल से घर लौटने के बाद वे शाम को गांव में घूमते रहते थे, लेकिन अब शाम 6 बजे के बाद घर में रहकर पढ़ाई करते हैं।इससे उन्हें पढ़ने के लिए ज्यादा समय मिल रहा है। इसका असर तिमाही परीक्षा के परिणाम में भी दिखाई दिया है.
बालोद जिले के स्थानीय शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी इस संबंध में कहना है कि ऐसी पहल से शिक्षकों और स्कूलों के ऊपर से अतिरिक्त ट्यूशन का दबाव कम होता है। ग्रामीण स्तर पर की गई यह अनुशासन व्यवस्था आने वाले समय में जिले के अन्य संकुलों के लिए भी एक बेहतरीन मॉडल साबित हो रही है।
उल्लेखनीय है कि पड़ोसी जिले धमतरी के बिरेतरा गांव में फरवरी की शुरुआत में जब इसी तर्ज पर शाम 6 बजे के बाद बच्चों के बाहर घूमने पर प्रतिबंध लगाने और पालकों द्वारा निगरानी करने का नियम बनाया गया, तो धमतरी के कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस ऐतिहासिक पहल की सराहना करते हुए कहा था कि ग्रामीणों और पालकों द्वारा बच्चों के हित में लिया गया यह सामूहिक निर्णय बेहद सराहनीय है।
अप्रैल 2026 में जब छत्तीसगढ़ बोर्ड के नतीजे घोषित हुए, तो बिरेतरा गांव के छात्र-छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत और अंक पहले के वर्षों की तुलना में काफी बेहतर रहे। इस नियम का सबसे खूबसूरत परिणाम यह रहा कि गांव का हर नागरिक बच्चों का अभिभावक बन गया। अगर कोई बच्चा शाम को गलती से बाहर दिख भी जाता, तो पड़ोसी उसे डांटने के बजाय प्यार से समझाकर घर भेज देते कि जाओ, 6 बज गए हैं, पढ़ाई करो।
बिरेतरा की इस भारी सफलता को देखकर आसपास के अन्य गांवों—रावनगुड़ा, लिमतरा और धौराभाठा ने भी अपने यहाँ इसे अपनाने की शुरुआत की और अब बालोद जिला भी इसी राह पर चल पड़ा है।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा