कुपोषण के खिलाफ धमतरी में तेज होगी मुहिम, 60 दिन में भरेंगे आंगनबाड़ी के रिक्त पद
धमतरी, 23 जुलाई (हि.स.)। महिला बाल विकास की आज योजनाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कुपोषण अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सागीदारी का अभियान है, जिसमें प्रत्येक अधिकारी और मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में गुरूवार काे आयोजित बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली, कुपोषण मुक्ति अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर अधिकतम 60 दिनों के भीतर नियमानुसार भरने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों और माताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
बैठक में जिले के 587 गंभीर कुपोषित बच्चों की जानकारी पर कलेक्टर ने पर्यवेक्षकों को अपने-अपने सेक्टर के सभी गंभीर कुपोषित बच्चों की नामवार सूची, अभिभावकों के संपर्क नंबर सहित तैयार रखने तथा प्रत्येक बच्चे की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पालकों से लगातार संवाद बनाए रखा जाए और आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाए। इसके लिए एनआरसी में प्रतीक्षा सूची तैयार रखने तथा प्रत्येक 15 दिन में नए पात्र बच्चों की भर्ती सुनिश्चित करने को कहा गया।
कुपोषण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए प्रत्येक सेक्टर के कम से कम 50 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों में 10 प्रतिशत बच्चों का वजन और ऊंचाई मापकर नामवार सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। सभी पर्यवेक्षकों को आगामी सप्ताह के गुरुवार तक सत्यापन रिपोर्ट जिला कार्यालय में प्रस्तुत करने को कहा गया। बैठक में बताया गया कि जिले के 103 आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह कुपोषण मुक्त हो चुके हैं। कलेक्टर ने इसे विभागीय प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताते हुए अन्य केंद्रों में भी इसी मॉडल को अपनाने पर जोर दिया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि 'सुपोषित धमतरी अभियान' के तहत जिले के 102 आंगनबाड़ी केंद्रों के 787 कुपोषित बच्चों को जिला स्तरीय अधिकारियों ने गोद लिया है। इन बच्चों को नियमित रूप से फल, पौष्टिक आहार और आवश्यक पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पाउडर भी वितरित किया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप केवल जून माह में 132 बच्चे कुपोषण की श्रेणी से बाहर आए हैं। बैठक में टेक होम राशन (टीएचआर) की आपूर्ति समय पर नहीं होने का मामला भी सामने आया, जिस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर नियमित और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को पोषण सामग्री वितरण प्रभावित न हो।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की समीक्षा के दौरान मगरलोड परियोजना में लक्ष्य के अनुरूप कम पंजीयन पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए शत-प्रतिशत पात्र हितग्राहियों का पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं महतारी वंदन योजना के 2932 लंबित ई-केवाईसी प्रकरणों को शीघ्र पूरा करने के लिए बुजुर्ग, पलायन कर चुके तथा बेड रेस्ट पर रहने वाले हितग्राहियों की अलग जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत स्वीकृत 18 आंगनबाड़ी भवनों में से 12 पूर्ण, पांच निर्माणाधीन तथा एक भवन भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबित होने की जानकारी दी गई। नगरी क्षेत्र के कमारपारा बिरनासिब्ली में निजी भूमि उपलब्ध कराने की सहमति मिलने पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए, साथ ही निर्माणाधीन भवनों को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए संबंधित एजेंसियों को पत्र जारी करने को कहा गया।
बैठक में नोनी सुरक्षा योजना, सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, सुकन्या समृद्धि योजना, सक्षम योजना तथा महिला कोष योजना की भी समीक्षा की गई। महिला कोष योजना के अंतर्गत ऋण वसूली की प्रगति का सेक्टरवार परीक्षण कर प्रत्येक प्रकरण पर पर्यवेक्षकों की टिप्पणी अनिवार्य रूप से संलग्न करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जयंत नाहटा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, सभी परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक उपस्थित रहे। कलेक्टर ने कहा कि सुदृढ़ मॉनिटरिंग, समयबद्ध कार्रवाई, जनसहभागिता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से धमतरी को कुपोषण मुक्त जिले के रूप में स्थापित करने के अभियान को और गति दी जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा