बस्तर के पटवारियों की हड़ताल जारी, किसानों की परेशानियां बढेगी
जगदलपुर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। बस्तर जिला मुख्यालय में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के आज गुरूवार काे भी जारी रहने से किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पीव्ही एप के प्लेटफॉर्म की जटिलता सहित पटवारियों की अन्य प्रमुख मांगें वेतन विसंगति और पदोन्नति है।
पटवारियाें का कहना है कि सरकार एक समय सीमा निर्धारित करें और चाहे वह 07 साल हो या 10 साल जिसके बाद पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जाए। वहीं एक तरफ बाढ़ की मार झेल चुके किसान और प्रभावित परिवार मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं, तो दूसरी तरफ पटवारियों की हड़ताल के कारण राजस्व संबंधी काम-काज प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर आने वाले दिनों में धान खरीद पर भी पड़ सकता है। जिन किसानों की गिरदावरी पूरी नहीं हुई है, उन्हें धान बेचने के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष आनंद कुमार कश्यप का कहना है कि वर्तमान में किसानों से जुड़ा सर्वे चल रहा था, जिसका नाम डीसीएस है, डीसीएस में 95 प्रतिशत काम पूरा किया गया। बचे हुए खसरे को पीव्ही एप के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया, इसकी जटिलता काफी अधिक है।उन्हाेने बताया कि खेतों के चारों कोने में जाकर फसल दर्ज करना होता है। जिसके बाद दोबारा यह डीसीएस के लिए जाएगा। यह कार्य पूरी तरह अव्यवहारिक है, इस कार्य को नहीं करने का विरोध किया जा रहा है। इस कार्य को नहीं करने पर स्थानांतरण और निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ी, जिससे पूरे प्रान्त के पटवारी गुस्से में हैं और हड़ताल पर चले गए हैं।
संघ के सदस्यों ने बताया कि पीव्ही ऐप में काम नहीं करने पर किसान अपना धान नहीं बेच पाएंगे। पीव्ही ऐप में काम करना काफी कठिन है, क्योंकि इसे बीच में बदल दिया जाता है। खसरों की गिरदावरी नहीं होने से धान नहीं चढ़ेगा, उन खसरों का धान बेचने में किसानों को काफी दिक्कतें आएंगी। डीसीएस की टेक्निकल समस्याओं को राज्य स्तर पर ठीक करना काफी जरूरी है। बस्तर में आई बाढ़ और उससे प्रभावित लोगों के मकान क्षति का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। फसल क्षति का कार्य रुका हुआ है, कई पटवारियों को 2-3 हल्के का चार्ज दिया गया है, ऐसे में काम करने में काफी परेशनी शाे रही है। डीसीएस में भी काफी दिक्कतें होती है क्योंकि एनआईसी नया नया एक्सपेरिमेंट करते रहता है। फील्ड में काम करने वाले डीसीएस सर्वेश्वर इतने पढ़े लिखें नहीं हैं, जो उस काम को कर सकें। कम से कम सर्वेयर सरकार नियुक्त करें और उनको बेहतर ट्रेनिंग दें, ताकि दिक्कतें न हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे