कलेक्टर ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के व्यापक सर्वेक्षण के लिए दिए निर्देश

 


जगदलपुर, 30 जून (हि.स.)। राज्य शासन द्वारा राज्य में विशेष आवश्यकता वाले इन बच्चों की सही पहचान, उनके प्रामाणिक सत्यापन और अद्यतन डेटा संकलन के लिए इस वृहद सर्वेक्षण अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसे पूरी पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाना है। उक्त परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर आकाश छिकारा ने जिले में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के व्यापक सर्वेक्षण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

जिसके तहत इसे जिला स्तरीय समय सीमा बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल करने का निर्णय लिया गया है, ताकि प्रत्येक स्तर पर इसकी निरंतर समीक्षा की जा सके और कार्य में कोई शिथिलता न आए। इस पूरे अभियान की सफलता हेतु स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के आपसी तालमेल और मैदानी स्तर पर समन्वित पहल सुनिश्चित की जाएगी।

इस दिशा में कलेक्टर ने उक्त तीनों विभागों को उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपते हुए सकारात्मक प्रयास करने को कहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के मेडिकल आकलन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल बोर्ड की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही विभाग विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणी और उसकी गंभीरता का भौतिक सत्यापन करेगा और पात्र बच्चों का यूनिक आईडी पोर्टल पर पंजीकरण कराने में सहयोग प्रदान करेगा। बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मार्गदर्शन देने के साथ-साथ विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा और बौद्धिक अक्षमता से ग्रसित बच्चों की सही पहचान के लिए साइकोलॉजिस्ट की सेवाएं भी ली जाएंगी।

इस अभियान में समाज कल्याण विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण तय की गई है, जिसके तहत विभाग अपनी कल्याणकारी योजनाओं जैसे पेंशन, छात्रवृत्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सर्वे टीम के साथ साझा करेगा। सर्वे के दौरान मैदानी स्तर पर चिन्हित होने वाले दिव्यांग बच्चों को उनकी पात्रता के अनुसार इन योजनाओं से तुरंत लिंक किया जाएगा ताकि उन्हें शासन की मदद मिल सके। साथ ही विभाग अपने पास पूर्व से उपलब्ध दिव्यांगता प्रमाण पत्र और दिव्यांगता आईडी से जुड़े डेटा को भी साझा करेगा ताकि सर्वेक्षण का कार्य अधिक सुगम और त्रुटिहीन बनाया जा सके।

शुरुआती स्तर पर बच्चों की पहचान को मजबूत बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को सक्रिय किया गया है, जिसके अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से 0 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों की प्रारंभिक सूची तैयार की जाएगी। विभाग की टीमें कुपोषित और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जानकारी साझा करने के साथ-साथ घर-घर जाकर समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगी। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक हस्तक्षेप के जरिए बच्चों में दिव्यांगता के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर उन्हें समय पर आवश्यक सहायता और उपचार प्रदान करना है।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे