मुर्गी और बकरी पालन से बदली शिवकुमार की तकदीर, हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई

 


बलरामपुर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए संचालित योजनाएं लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित हो रही हैं। रामचन्द्रपुर विकासखंड की धौली ग्राम पंचायत के निवासी शिवकुमार ने मुर्गी और बकरी पालन को आजीविका का माध्यम बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। आज वे इस व्यवसाय से हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

कुछ समय पहले तक शिवकुमार सीमित आय के साधनों पर निर्भर थे। ऐसे में परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौती बना हुआ था। इसी दौरान उन्हें संसदीय संकुल विकास परियोजना के बारे में जानकारी मिली। परियोजना के तहत उन्होंने मुर्गी और बकरी पालन का प्रशिक्षण लिया। इसमें पशुओं की देखभाल, पोषण, बीमारियों से बचाव और बेहतर प्रबंधन की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण से मिले ज्ञान और मार्गदर्शन के आधार पर शिवकुमार ने गांव में ही मुर्गी और बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत और बेहतर तकनीक अपनाने से उनका काम आगे बढ़ा और अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन गया। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की शिक्षा में भी इस आय से मदद मिल रही है।

शिवकुमार की सफलता से गांव के दूसरे युवा भी पशुपालन को स्वरोजगार के विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। यह उदाहरण बताता है कि उचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण अपने गांव में ही रोजगार के अवसर तैयार कर सकते हैं। सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य भी ग्रामीणों को आजीविका के साधनों से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय