बालको में सुरक्षा संस्कृति को मिला नया बल, पांच वर्षों में 27,000 से अधिक लोगों को सुरक्षा प्रशिक्षण

 


कोरबा, 28 सितंबर (हि. स.)। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में सुरक्षा केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काम करने के तरीके और व्यवहार का अभिन्न हिस्सा है। बालको ने अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण, व्यावहारिक गतिविधियों और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों, आगंतुकों और आसपास के समुदायों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया है। इन प्रयासों का उद्देश्य ‘जीरो हार्म’ की संस्कृति को मजबूत करना और सभी के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

बालको में सभी कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और आगंतुकों के लिए सुरक्षा इंडक्शन अनिवार्य है। इसके माध्यम से कार्यस्थल पर मौजूद संभावित जोखिमों और जरूरी सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जाती है। प्रचालन क्षेत्र में प्रवेश से पहले प्रतिभागियों को सुरक्षा प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाता है और इसके बाद सुरक्षा से जुड़ा आकलन भी किया जाता है। पिछले पांच वर्षों में बालको ने 27,000 से अधिक लोगों को सुरक्षा इंडक्शन दिया है। वहीं, वित्तवर्ष 2026 में 2.30 लाख से अधिक मैन-आवर्स का सुरक्षा प्रशिक्षण पूरा किया गया।

सुरक्षा को व्यवहार का हिस्सा बनाने पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश कुमार सिंह ने कहा, “बालको में सुरक्षा हमारे काम करने, नेतृत्व करने और हर दिन निर्णय लेने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जीरो हार्म हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता, जिम्मेदारी और एक-दूसरे की चिंता के माध्यम से हम सुरक्षा को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं, ताकि हर व्यक्ति सुरक्षित रूप से घर लौटे।”

बालको ने सुरक्षा प्रशिक्षण को नियमित गतिविधियों से आगे बढ़ाकर व्यवहार में शामिल करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। ‘सुरक्षा संकल्प’ के माध्यम से लगभग पांच वर्षों से कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों के बीच सुरक्षा जागरूकता बढ़ाई जा रही है। हर सत्र में अलग विषय के माध्यम से सुरक्षा के बेहतर तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

‘सुरक्षा स्टीवर्ड’ के तहत शॉप फ्लोर से चुने गए सुरक्षा चैंपियन अपने साथियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों के लिए प्रेरित करते हैं। ‘सुरक्षा पहल’ सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, जबकि ‘सुरक्षा ज्योति’ के माध्यम से सुपरवाइजरों को सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण देकर उनके नेतृत्व कौशल को मजबूत किया जाता है। वहीं, ‘सुरक्षा प्रहरी’ और ‘सुरक्षा चौपाल’ जैसे संवादात्मक मंचों के माध्यम से वरिष्ठ प्रबंधन और सुपरवाइजर सुरक्षा से जुड़े विषयों, चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर सीधे संवाद करते हैं।

इस वर्ष की शुरुआत में बालको ने ‘सेफ्टी पार्क’ भी शुरू किया। यह एक अनुभव आधारित प्रशिक्षण केंद्र है, जहाँ मॉडल, व्यावहारिक मॉड्यूल और दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सुरक्षा नियमों को आसानी से समझाया जाता है। इससे प्रतिभागियों को सुरक्षा प्रक्रियाओं को देखकर और समझकर सीखने का अवसर मिलता है।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बालको के प्रयासों को ग्लोबल रोड सेफ्टी अवॉर्ड 2026 से भी सम्मानित किया गया है। यह सम्मान बालको द्वारा सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की पहचान है।

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी