अंबिकापुर : सकालो पिग फार्म में अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन का ऐतिहासिक ट्रायल, बूस्टर डोज लगाने भोपाल से पहुंचे वैज्ञानिक
अंबिकापुर, 07 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित शासकीय सुकर फार्म, सकालो में इन दिनों एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक वैज्ञानिक अनुसंधान चल रहा है। यहां सूअरों के लिए जानलेवा साबित होने वाली बीमारी 'अफ्रीकन स्वाइन फीवर' (ASF) की वैक्सीन का देश में पहला ट्रायल किया जा रहा है। मार्च महीने से शुरू हुए इस ट्रायल के अगले चरण के तहत वैक्सीन की बूस्टर डोज लगाने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज (NIHSAD), भोपाल के वैज्ञानिकों की विशेष टीम अंबिकापुर पहुंची है। पशुपालन विभाग के संचालक के दिशा-निर्देशों पर चल रहे इस बेहद संवेदनशील परीक्षण का निरीक्षण और मूल्यांकन करने के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश, डॉ. सेंथिल कुमार तथा डॉ. राजू कुमार समय-समय पर फार्म का दौरा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अफ्रीकन स्वाइन फीवर सूअरों में होने वाली एक अत्यंत घातक और संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसमें संक्रमित होने पर सूअरों की मृत्यु दर लगभग शत-प्रतिशत होती है। यह बीमारी घरेलू और जंगली, दोनों ही प्रकार के सूकरों को अपनी चपेट में लेती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में इस खतरनाक बीमारी का दुनिया भर में कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है। भारत सहित विश्व के अधिकांश देशों में अब तक ASF के लिए कोई भी पूर्ण रूप से स्वीकृत व्यावसायिक (कमर्शियल) वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, यही वजह है कि भोपाल के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई इस स्वदेशी वैक्सीन के ट्रायल को देश के पशुपालन क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।
इस ट्रायल की संवेदनशीलता और सुरक्षा को लेकर पिग फार्म अंबिकापुर के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि पशुपालन विभाग के संचालक के निर्देशानुसार शासकीय सुकर फार्म में यह ट्रायल पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित माहौल में संचालित किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि ट्रायल के दौरान सभी कड़े वैज्ञानिक मानकों और उच्च स्तरीय जैव-सुरक्षा (Biosecurity) उपायों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह का जोखिम न रहे। फार्म प्रबंधन और वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि यदि अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन का यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहता है, तो इसका सीधा लाभ न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों के भी सुकर पालकों को मिलेगा। इस जानलेवा बीमारी के कारण हर साल पशुपालकों को होने वाली भारी आर्थिक क्षति से हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी और यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह