25 को अनंत चतुर्दशी एवं गणेश विसर्जन 26 को
धमतरी, 24 सितंबर (हि.स.)। हिंदू धर्म में व्रत, पर्व, त्योहार, संस्कार एवं धार्मिक अनुष्ठानों का निर्धारण तिथि, नक्षत्र एवं पंचांग की गणना के आधार पर किया जाता है। धार्मिक कार्यों की गणना केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों के आधार पर नहीं होती है। इसी क्रम में विप्र विद्वत परिषद धमतरी ने देव पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी एवं पितृपक्ष की तिथियों को लेकर चल रहे असमंजस को दूर करते हुए स्थिति स्पष्ट की है।
विप्र विद्वत परिषद के अध्यक्ष पंडित बालेन्द पाण्डेय, मीडिया सलाहकार पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि इस वर्ष 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी व्रत एवं गणेश विसर्जन किया जाएगा। इसके पश्चात 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध तथा 27 सितंबर, रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृपक्ष का 'प्रारंभ होगा। परिषद ने स्पष्ट किया कि तिथि की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित पंचांग पद्धति से होती है। इसलिए किसी पर्व या धार्मिक अनुष्ठान की तिथि निर्धारित करते समय केवल तारीख को आधार मानना उचित नहीं है।
पंचांग में निर्धारित तिथि के अनुसार ही धार्मिक कार्य संपन्न किए जाते हैं। विप्र विद्वत परिषद ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि देव पंचांग में निर्धारित तिथियों के अनुसार ही अनंत चतुर्दशी व्रत, गणेश विसर्जन एवं पितृपक्ष के श्राद्ध कर्म संपन्न करें तथा तिथियों को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति में विद्वान आचार्यों एवं पंडितों से मार्गदर्शन प्राप्त करें। विप्र विद्वत परिषद के मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी के अनुसार परिषद ने कहा कि सनातन परंपरा में पंचांग और तिथि का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक एवं कर्मकांडों की शुद्धता के लिए तिथि का सही निर्धारण आवश्यक है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा