टाइगर रिजर्व में विस्थापन के दबाव का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

 

धमतरी, 17 अगस्त (हि.स.)। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के प्रभावित गांवों में विस्थापन के कथित दबाव को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। गांव छोड़ने के लिए बनाए जा रहे दबाव को तत्काल रोकने, ग्रामसभा की सहमति एवं निर्णय का सम्मान करने तथा वनांचल के गांवों में ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति सीतानदी-उदंती क्षेत्र धमतरी-गरियाबंद के प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने सोमवार को जिला कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखी।

ग्रामीणों ने कहा कि उनके पूर्वज पीढ़ियों से इन गांवों में निवास करते आ रहे हैं और उनका जल, जंगल व जमीन से आर्थिक जुड़ाव के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक संबंध भी है। ऐसे में वे अपनी पुश्तैनी जमीन और गांव छोड़कर विस्थापित नहीं होना चाहते। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों पर गांवों में पहुंचकर विस्थापन के संबंध में जानकारी देने और ग्रामीणों को गांव छोड़ने के लिए तैयार करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इससे ग्रामीणों में भय, असमंजस और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। समिति ने विस्थापन के लिए किसी भी प्रकार का दबाव तत्काल रोकने तथा ग्रामसभा की सहमति एवं निर्णय का पूरा सम्मान करने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो उन्हें गांव छोड़ने की आवश्यकता ही नहीं होगी। पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी ने कहा कि वनांचल के ग्रामीण लंबे समय से वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने अधिकारों और पट्टों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने लंबित एवं निरस्त वन अधिकार दावों का नियमानुसार निराकरण करने तथा ग्रामसभा की भूमिका और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पेसा एवं वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण पालन होना चाहिए।

वनांचल के ग्रामीण सदियों से जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ सह-अस्तित्व में जीवन जीते आए हैं। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ जंगल पर निर्भर लोगों के अधिकार और अस्तित्व की रक्षा भी महत्वपूर्ण है। इस दौरान ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत रिसगांव के अंतर्गत संचालित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रिसगांव में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी कलेक्टर के समक्ष उठाया। इस संबंध में अलग से ज्ञापन सौंपकर रिक्त पदों पर तत्काल शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की गई।

ग्रामीणों के अनुसार शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से कई बच्चे स्कूल छोड़ने लगे हैं, जिससे पालकों में बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। ज्ञापन में बताया गया कि विद्यालय में व्याख्याता गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं व्यवसाय विषय के एक-एक पद तथा विज्ञान सहायक के दो पद सहित कुल छह पद रिक्त हैं। ग्रामीणों ने कहा कि जब विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं तो बच्चों का शिक्षा स्तर बेहतर करने की अपेक्षा कठिन है।

उन्होंने कलेक्टर से रिक्त पदों पर शीघ्र शिक्षक नियुक्त करने अथवा वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित हो सके और वनांचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। ग्रामीणों ने प्रशासन से विस्थापन और शिक्षा दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

इस अवसर पर मनोज कुमार साक्षी, बीरबल पद्माकर, रवि नेताम, रेवा देवदास, संतराम नेताम, हिम्मत सिंह नेताम, धनेश मरकाम, गजेन्द्र पदमाकर चंन्द्र कुमार अग्रवाणी सहित ग्रामवासी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा