सूरजपुर : कृषि एवं संबद्ध विभागों की समीक्षा, किसान हित में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

 


केसीसी ऋण वितरण में तेजी लाने पर जोर, मत्स्य, पशुपालन और उद्यानिकी में एकीकृत विकास की रूपरेखा पर चर्चा

सूरजपुर, 25 जून (हि.स.)। कलेक्टर रेना जमील ने गुरुवार को कृषि एवं संबद्ध विभागों की विस्तृत समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले सहित पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी, डीआरसीएस, सीसीबी नोडल अधिकारी एवं सहकारी समितियों के प्रबंधक उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से पशुपालक किसानों को चारे एवं फीडिंग के लिए ऋण उपलब्ध कराने, साथ ही उद्यानिकी फसलों और मत्स्य पालन हेतु केसीसी ऋण वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने समितिवार ऋण वितरण की स्थिति की समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों के कारणों की जानकारी ली और बिना उचित कारण आवेदन लंबित रखने पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने कहा कि उद्यानिकी फसल लेने वाले किसान यदि पूर्व फसल के स्थान पर नई फसल के लिए आवेदन करते हैं तो उन्हें भी केसीसी ऋण का लाभ समय पर मिलना चाहिए। उन्होंने धान खरीद को ध्यान में रखते हुए एग्रीस्टैक पंजीयन कार्य को भी प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में खरीफ सीजन के मद्देनजर बीज भंडारण और खाद-बीज वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। साथ ही मत्स्य विभाग के अंतर्गत प्रतापपुर के खोरमा में निर्माणाधीन मत्स्य प्रक्षेत्र की प्रगति की जानकारी ली गई।

कलेक्टर ने जिले में झींगा एवं सजावटी मछली उत्पादन, अमृत सरोवरों और मनरेगा डबरी में मत्स्य पालन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने सक्रिय एवं निष्क्रिय तालाबों की स्थिति और मत्स्य उत्पादन क्षमता का आकलन कर विकास की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

मत्स्य पालन को पशुपालन और उद्यानिकी गतिविधियों के साथ जोड़कर एकीकृत आजीविका मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने केज कल्चर के विस्तार, मछली के साथ बतख पालन को बढ़ावा देने तथा उपयुक्त स्थलों की पहचान कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

पशुधन विकास विभाग की समीक्षा में पशु स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार कार्यक्रमों तथा पशुपालन गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री और सूकर पालन को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान शहद उत्पादन, सब्जी एवं मसाला फसलों के विकास पर चर्चा की गई। कलेक्टर ने मत्स्य तालाबों की मेड़ों पर पौधारोपण, स्व-सहायता समूहों को फूल उत्पादन से जोड़ने तथा अदरक, हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी मसाला फसलों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने सभी विभागों को समन्वित प्रयासों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और जिले की उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय