आठ बरस बाद जंगल में गूंजी बाघिन की दहाड़

 


धमतरी, 22 जून (हि.स.)। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से एक सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लगभग आठ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रिजर्व क्षेत्र में एक बाघिन की मौजूदगी दर्ज की गई है। ट्रैप कैमरों में कैद हुई तस्वीरों और वीडियो फुटेज ने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है। विशेषज्ञ इसे बाघ संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें समय-समय पर भालू, हिरण, तेंदुआ, उल्लू और बाघ जैसे वन्यजीवों की गतिविधियां रिकॉर्ड होती रही हैं। इस बार कैमरों में एक बाघिन की स्पष्ट तस्वीर और उसकी नियमित गतिविधियां दर्ज होने से क्षेत्र में बाघों के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी टाइगर रिजर्व में बाघिन की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बाघिन न केवल स्वस्थ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत देती है, बल्कि भविष्य में बाघों की संख्या बढ़ने की संभावनाओं को भी मजबूत बनाती है। लंबे समय से बाघिन की अनुपस्थिति के कारण यहां बाघों का स्थायी निवास नहीं बन पा रहा था। अब बाघिन के आगमन से बाघों के लंबे समय तक क्षेत्र में ठहरने और प्रजनन की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने साेमवार काे बताया कि बाघिन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। कैमरा ट्रैप और फील्ड मॉनिटरिंग के माध्यम से उसकी आवाजाही का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि उसके लिए सुरक्षित आवास और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि संरक्षण के प्रयास इसी प्रकार जारी रहे तो आने वाले वर्षों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व एक बार फिर बाघों की सुरक्षित शरणस्थली के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा