अधिवक्ता परिषद के अभ्यास वर्ग में अधिवक्ताओं के प्रश्नों-जिज्ञासाओं का हुआ समाधान
जगदलपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की प्रांतीय इकाई अधिवक्ता परिषद छत्तीसगढ़ प्रांत का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग जगदलपुर में प्रदेश के विभिन्न जिलों, तहसीलों एवं इकाइयों से आए अधिवक्ताओं एवं कार्यकर्ताओं की सहभागिता से रविवार काे सम्पन्न हुआ।
अभ्यास वर्ग का शुभारंभ प्रथम दिवस पंजीयन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में माँ भारती एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के क्षेत्र संयोजक प्रदीप सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री भरत कुमार एवं राष्ट्रीय मंत्री विक्रम दुबे सहित वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। अभ्यास वर्ग के दौरान विभिन्न आयामों की बैठकें आयोजित कर आगामी कार्ययोजनाओं, संगठन के विस्तार एवं संबंधित गतिविधियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इसके पश्चात जिज्ञासा समाधान सत्र में प्रतिभागी अधिवक्ताओं के प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने अधिवक्ता परिषद के उद्देश्य, संगठनात्मक दायित्व तथा अधिवक्ताओं की सामाजिक भूमिका पर मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रीय महामंत्री भरत कुमार जी ने अभ्यास वर्ग की आवश्यकता एवं उसके मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अधिवक्ताओं से न्यायालयीन दायित्वों के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने व्यापक उत्तरदायित्व को समझने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय मंत्री विक्रम दुबे ने “अधिवक्ता परिषद के उद्देश्य एवं आगामी दृष्टि” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए संगठन की कार्यपद्धति, प्राथमिकताओं एवं भविष्य की दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज के वंचित एवं पीड़ित वर्गों तक न्याय सुलभ कराने तथा न्याय, समाज एवं राष्ट्रहित के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अभ्यास वर्ग के प्रथम दिवस बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव ने बस्तर की गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं तथा प्राचीन न्याय-व्यवस्था पर संबोधन दिया। उनके वक्तव्य ने उपस्थित अधिवक्ताओं को बस्तर के इतिहास, लोक जीवन एवं न्याय परंपराओं को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया।
द्वितीय दिवस में आज कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण एवं नागरिक कर्तव्य जैसे जीवन-मूल्यों को केवल विचार तक सीमित न रखकर व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में व्यवहार का हिस्सा बनाने पर विशेष बल दिया गया। इसके पश्चात मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खंडपीठ के अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपेंद्र कुशवाहा ने “कार्य, कार्यकर्ता और संगठन” विषय पर प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उन्होंने संगठन के प्रति कार्यकर्ता के दायित्व, अनुशासन, समर्पण एवं निरंतर सक्रियता के महत्व को रेखांकित किया।
समापन सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता श भूपेंद्र राठौर के प्रेरणादायी उद्बोधन से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जिला इकाई जगदलपुर के कार्यकर्ताओं एवं व्यवस्थाकारों को मंच पर सम्मानित किया गया।
जिला इकाई जगदलपुर के अध्यक्ष अर्पित मिश्रा ने सभी अतिथियों, अधिवक्ताओं एवं कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
अधिवक्ता परिषद छत्तीसगढ़ प्रांत का यह दो दिवसीय अभ्यास वर्ग केवल एक संगठनात्मक आयोजन न होकर ज्ञान, संगठन, संस्कार, संस्कृति, कर्तव्यबोध एवं राष्ट्रचेतना के समन्वय का जीवंत अवसर बना। अभ्यास वर्ग ने सहभागी अधिवक्ताओं एवं कार्यकर्ताओं को न्याय के प्रति प्रतिबद्धता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रहित के प्रति समर्पण के साथ संगठन को और अधिक सशक्त एवं व्यापक बनाने की नई ऊर्जा प्रदान की। “न्यायः मम धर्मः” के ध्येय वाक्य के साथ अधिवक्ता परिषद ने न्याय, समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे